Section 8 of The Jharkhand State University Act, 2026 — राज्य सरकार की शक्ति
Bare section text
Official Legislative Text
- (1)राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना विश्वविद्यालय निम्नलिखित कार्य नहीं कर सकेगा:- (क) स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के संचालन को छोड़कर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के लिए नए पदों का सृजन करना; (ख) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए वेतन, भत्तों, सेवानिवृत्तोत्तर लाभ एवं अन्य लाभों की स्वीकृति एवं पुनरीक्षण करना; (ग) किसी विशेष उद्देश्य हेतु प्राप्त निधियों को अन्य किसी प्रयोजन में परिवर्तित करना; (घ) विश्वविद्यालय की अचल संपत्ति को विक्रय अथवा पट्टे द्वारा स्थानांतरित करना; तथा (ङ) राज्य सरकार, केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी स्रोत से प्राप्त निधियों का उपयोग किसी विकास कार्य हेतु करना, जब तक कि वह निधि उसी प्रयोजन के लिए प्राप्त न हुई हो।
- (2)राज्य सरकार, इस अधिनियम में निहित उपबंधों के अनुरूप सभी विश्वविद्यालयों में समान शैक्षणिक मानकों को सुनिश्चित करने हेतु, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित परिनियम के प्रावधान निम्नलिखित कार्यों हेतु होंगे:- (क) विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की सेवा का वर्गीकरण, चयन की विधि एवं प्रक्रिया, पदों के लिए योग्यता एवं अनुभव, नियुक्ति की प्रक्रिया, प्रारंभिक, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय अनुभव, प्रतिनियोजन, राज्य की आरक्षण नीति के अनुसार पदों का आरक्षण, कर्त्तव्य, कार्यभार, वेतन, भत्ते, सेवानिवृत्तोत्तर लाभ एवं अन्य लाभ, आचरण, अनुशासनात्मक विषयों एवं अन्य सेवा सम्बन्धी शर्तों हेतु; (ख) महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने, सम्बद्धता की निरंतरता बनाए रखने तथा सम्बद्धता की वापसी अथवा असम्बद्धता से सम्बंधित प्रक्रिया, मानदंड, मानक एवं प्रक्रिया को विनियमित करने वाले उपबंध; जिनमें शैक्षणिक प्रदर्शन, भौतिक आधारभूत संरचना के मानक, वित्तीय व्यावहारिकता, शासन प्रणाली, प्रबंधन पद्धतियाँ तथा अन्य ऐसे विषय जिन्हें आवश्यक समझा जाए, सम्मिलित होंगे; (ग) यह प्रावधान विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों, समितियों, परिषदों,तथा पदाधिकारियों की स्थापना, संरचना, गठन अथवा नियुक्ति की प्रक्रिया, अहर्ताएँ, कार्यकाल, कर्तव्यों, अधिकारों, उत्तरदायित्वों, प्रतिवेदन दायित्वों, आचारसंहिता, निर्णय लेने की प्रक्रिया, प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय भूमिकाओं की परिभाषा तथा कुलपति, प्रति-कुलपति कुल सचिव, वित्त परामर्शी, अधिष्ठाता, निदेशक एवं अन्य वैधानिक पदाधिकारियों के परस्पर संबंधों से सम्बंधित होगा; (घ) शैक्षणिक मामलों का संचालन और प्रशासन, पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या की रूपरेखा, छात्र कल्याण, कर्मचारियों और छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा, कर्मचारियों और छात्रों के लिए स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं, गुणवत्ता मानक, संस्थागत मूल्यांकन, प्रत्यायन और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय रैंकिंग प्रणाली एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक कार्यक्रमों का विकास, समीक्षा एवं समय-समय पर पुनरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा; (ङ) विश्वविद्यालय और उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के कर्मचारियों के पदों का सृजन, वेतन निर्धारण, स्थानांतरण, पदस्थापन और प्रतिनियुक्ति के सम्बन्ध में परिनियमों का निर्माण और निर्धारण; (च) बुनियादी ढाँचे के विकास, क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों की स्थापना और संचालन तथा पर्यावरणीय, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) पहलों के कार्यान्वयन हेतु परिनियमों का निर्माण और निर्धारण; (छ) विश्वविद्यालय, उसके अंगीभूत और संबद्ध संस्थानों के कर्मचारियों और छात्रों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना, संचालन, मानकीकरण तथा प्रभावी क्रियान्वयन; (ज) झारखण्ड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की स्थापना, संरचना, शक्तियां, कार्य और प्रक्रियाएँ ; तथा (झ) राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित कोई अन्य विषय।
- (3)राज्य सरकार को निम्नलिखित से सम्बंधित शक्तियां होंगी :- (क) कर्मचारियों की सेवा शर्तें, अर्थात् :-
- (i)केवल विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय विभाग और अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पद सृजन की शक्ति;
- (ii)स्वीकृत पदों के विरुद्ध कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए रोस्टर की स्वीकृति;
- (iii)कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति, विश्वविद्यालय के भीतर स्थानांतरण तथा कर्मचारियों के अन्तर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण को स्वीकृति देने हेतु तंत्र को अनिवार्य बनाना;
- (iv)विश्वविद्यालय के कुलपति तथा प्रति-कुलपति का चयन;
- (v)स्व-वित्तपोषित, बाह्य वित्तपोषित या परियोजना आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा पदों के सृजन हेतु शर्तें निर्धारित करना, जिसमें ऐसे पदों के अनुमोदन, कार्यकाल, नवीकरण और समाप्ति हेतु दिशा-निर्देश शामिल हैं;
- (vi)स्वीकृत पदों पर नियुक्त कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य लाभों के निर्धारण और संशोधन हेतु मानक और प्रक्रियाएँ;
- (vii)विश्वविद्यालय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण हेतु राज्य सरकार के लिए नियामक ढाँचा, जिसमें कार्यान्वयन प्रक्रियाएँ, लेखा परीक्षण और विसंगतियों के सुधार शामिल हैं;
- (viii)विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की अन्य शैक्षणिक संस्थानों, राज्य निकायों, अनुसंधान संगठनों अथवा सरकार के अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए शर्तें, कार्यकाल तथा अनुमोदन की प्रक्रिया; तथा
- (ix)विश्वविद्यालयों में एक निष्पक्ष, योग्यता-आधारित एवं दक्ष मानव संसाधन प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक या प्रासंगिक कोई भी विषय। (ख) निधियाँ, लेखा और वित्तीय लेखा परीक्षण, अर्थात् :-
- (i)विश्वविद्यालय तथा उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन की देखरेख करना, तथा विश्वविद्यालय और उसकी अंगीभूत इकाइयों के खातों का नमूना लेखा परीक्षण या पूर्ण लेखा परीक्षण नियमित रूप से या ऐसी अवधि में करना जैसा उपयुक्त प्रतीत हो ;
- (ii)विशेष उद्देश्यों के लिए विशेष कोष या खाते स्थापित करना। विश्वविद्यालय को अनुदान और ऋण स्वीकृत करना तथा ऐसी वित्तीय सहायता के लिए शर्तों और नियमों को विनियमित करना ;
- (iii)विश्वविद्यालय के कोषों से किए गए लेन-देन के लिए लेखांकन, अभिलेखों का संधारण, पुस्तकों और अन्य दस्तावेजी या डिजिटल अभिलेखों के मानक निर्धारित करना;
- (iv)किसी भी संबद्ध, अंगीभूत, या स्वायत्त महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का निरीक्षण किसी भी समय, जब उचित प्रतीत हो ; तथा
- (v)विश्वविद्यालयों के प्रभावी वित्तीय प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए अन्य आवश्यक या प्रासंगिक कार्य करना। (ग) निदेश, आदेश तथा उनका अनुपालन, अर्थात् :-
- (i)इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य किसी विनियामक निकाय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुपालन हेतु समय-समय पर आवश्यकतानुसार या जैसा उपयुक्त समझा जाए, कोई भी निदेश, आदेश, या अधिसूचना जारी करना जिसका अनुपालन सभी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा;
- (ii)यदि विश्वविद्यालय धारा 5 में विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग करने अथवा कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहता है, या विश्वविद्यालय द्वारा ऐसी शक्तियों का समुचित प्रयोग नहीं किया जाता अथवा कर्तव्यों का समुचित पालन नहीं किया जाता, या विश्वविद्यालय राज्य सरकार द्वारा जारी किसी निदेश या आदेश या अधिसूचना के अनुपालन में विफल रहता है, या राज्य सरकार किसी अन्य परिस्थिति में उचित समझे तो राज्य सरकार विश्वविद्यालय को उक्त शक्तियों के समुचित प्रयोग, कर्तव्यों के निष्पादन अथवा आदेश के अनुपालन हेतु निदेश जारी कर सकती है। विश्वविद्यालय के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वह ऐसे सभी निदेशों का अनुपालन करे । (घ) आयोग का संचालन, अर्थात् :-
- (i)आयोग के अध्यक्ष, सदस्य (प्रशासन), तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान;
- (ii)सचिव, उप-सचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी तथा अन्य किसी भी कर्मचारी सहित आयोग के कर्मचारियों के पदों का सृजन तथा उनकी सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान;
- (iii)किसी भी उपयुक्त विषय पर निदेश जारी करना तथा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए योग्यता मापदंड, अर्हता मापदंड, आरक्षण नीति, उम्र सीमाएँ और समतुल्यता शर्तों पर परामर्श प्राप्त करना; तथा
- (iv)आयोग के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कोई अन्य आवश्यक या प्रासंगिक विषय। (ङ) आधारभूत संरचना का निर्माण और रख-रखाव, अर्थात् :-
- (i)विश्वविद्यालय मुख्यालय, अंगीभूत महाविद्यालयों एवं संबद्ध परिसरों के लिए भौतिक, अकादमिक, डिजिटल, एवं आवासीय आधारभूत संरचना का विकास, उन्नयन, और अनुरक्षण जिसमें वित्त पोषण की व्यवस्थाएं, तकनीकी मानक, अनुमोदन प्रक्रियाएँ और अनुपालन की समय सीमाएँ शामिल हैं;
- (ii)विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों की स्थापना, प्रादेशिक क्षेत्राधिकार, प्रशासनिक संरचना और परिचालन शासन के लिए मानदंडों और प्रक्रियाओं का निर्धारण, जिसमें विश्वविद्यालय की भूमिकाएं भी शामिल हैं;
- (iii)विश्वविद्यालय की आवश्यकता आकलन और अनुशंसाओं के आधार पर सामुदायिक महाविद्यालयों की स्थापना;
- (iv)विश्वविद्यालय परिसरों, अंगीभूत महाविद्यालयों, क्षेत्रीय केन्द्रों और अध्ययन केन्द्रों, में ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन फुटप्रिंट और संबंधित मानकों का आकलन करने हेतु सक्षम प्राधिकारियों या एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवधिक हरित अंकेक्षण का अनिवार्य संचालन; तथा
- (v)कोई अन्य विषय जिसे राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में पर्यावरण के लिए विशेषकर, सामाजिक रूप से उत्तरदायी तथा संस्थागत रूप से जवाबदेह वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समझे। (च) अनुदान सहायता और प्रोत्साहन, अर्थात् :-
- (i)विश्वविद्यालय या अंगीभूत महाविद्यालय को दिए जानेवाले अनुदान या निधियों के लिए मानदंड निर्धारित करना;
- (ii)विश्वविद्यालय, अंगीभूत महाविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारियों के लिए कार्य निष्पादन आधारित प्रोत्साहनों हेतु योजनाएँ तैयार करना;
- (iii)अनुदानों के उपयोग की निगरानी करना और विश्वविद्यालयों के घाटा वित्तपोषण आधारित लेखांकन को अनिवार्य बनाना; तथा
- (iv)वित्तीय सावधानी को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय को प्रोत्साहन प्रदान करने से सम्बंधित अन्य कोई विषय। (छ) कर्मचारियों और छात्रों की शिकायत का निवारण, अर्थात्:-
- (i)छात्र शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी), कर्मचारी शिकायत निवारण समिति (ईजीआरसी) तथा कर्मचारी शिकायत निवारण प्राधिकरण (ईजीआरटी) का अधिदेश, उनकी संस्थागत संरचना, क्षेत्राधिकार, प्रक्रिया एवं कार्यप्रणाली को इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रदान किए गए प्रावधानों के अनुसार उनके उद्देश्य, संरचना, कार्यकाल, कोरम शक्तियाँ तथा कर्तव्य सम्मिलित हैं, विनिर्दिष्ट किए जाते हैं;
- (ii)ई.जी.आर.सी. और ई.जी.आर.टी. के सदस्यों की नियुक्ति एवं प्रतिनियोजन की प्रक्रिया के साथ-साथ उनके वेतन और भत्तों का निर्धारण करना;
- (iii)प्रवेश