Section 4 of The Jharkhand State University Act, 2026 — विश्वविद्यालय के उद्देश्य
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Official Legislative Text
विश्वविद्यालय के उद्देश्य
- (1)विश्वविद्यािय के उद्देश्य सामान्यतः विक्षण, अनुसंधान एिं विकास, कौिि विकास, प्रविक्षण एिं
| विक्षा, प्रसार एिं सेिा के | माध्यम से ज्ञान एिं समझ का प्रसार, सृिन एिं संरक्षण करना होगा तथा |
|---|---|
| अपने संगवठत िीिन के | प्रभािी प्रििवन एिं सामाविक प्रभाि द्वारा समाि में सकारात्मक योगिान |
| िेना होगा। वििेि रूप से, विश्वविद्यािय के | वनम्नविखखत उद्देश्य होंगे- |
| (क) ज्ञान के | सृिन, संरक्षण एिं प्रसार का अपना उत्तरिावयत्व का वनिवहन करना; |
(ख) अनुिासन तथा बौखद्धक विज्ञासा की भािना को प्रोत्सावहत करना एिं स्वयं को एक वनडर
अकािवमक समुिाय के रूप में उत्कृ ष्टता की सतत खोि हेतु समवपवत करना;
(ग) सवहष्णुता एिं परस्पर समझ की भािना को बनाए रखते हुए व्यखित्व एिं विविधता को प्रोत्सावहत करना;
(घ) भारत के संविधान में वनवहत स्वतंत्रता, धमववनरपेक्षता, समानता, सामाविक न्याय को बढ़ािा
िेना तथा राष्ट र ीय विकास की मूिभूत प्रिृवत्तयों एिं मूल्ों को प्रेररत कर िेिभखिपरक सामाविक-आवथवक पररितवन का प्रेरक बनना;
| (ङ) सामाविक समरसता, सह-अखस्तत्व, समग्र मानितािाि तथा समाि के | अत्यंत िंवचत िगव |
|---|---|
| के | उत्थान को सुवनवित करने हेतु अनुकू ि िातािरण को बढ़ािा िेना; |
(च) विश्वविद्यािय को स्थानीय, क्षेत्रीय एिं राष्ट र ीय विकास की समस्याओं से घवनष्ठ रूप से
िोड़कर, व्यखियों एिं समाि के विकास हेतु ज्ञान, िीिन एिं रोिगारपरक कौििों का
विस्तार करना;
| (छ) एक िागरूक एिं वनष्पक्ष समीक्षक के | रूप में सामाविक उत्तरिावयत्व का वनिवहन करना, |
|---|---|
| प्रवतभा की पहचान एिं संिधवन करना, सभी िीिन-क्षेत्रों में उपयुि नेतृत्व के | प्रविक्षण |
| हेतु प्रयासरत रहना, तथा युिाओं को उवचत दृवष्टकोण, अवभरुवच एिं मूल्ों के | विकास में |
सहायता प्रिान करना; (ि) उच्च विक्षा की विक्षण, अवधगम, प्रविक्षण एिं अन्य सहायता सेिाओं की सुविधाओं के समान वितरण को प्रोत्सावहत करना; (झ) अत्याधुवनक संचार, मीवडया एिं प्रौद्योवगवकयों का उपयोग कर सामाविक समस्याओं के समाधान हेतु अनुसंधान एिं निाचार में प्रविक्षण एिं कौिि संिधवन को प्रोत्सावहत करना; (ञ) ऐसी प्रेरक प्रणावियों का वनमावण करना, विससे वकसी भी व्यखि की बौखद्धक क्षमता सीवमत न हो, बखल्क निाचार की भािना, साथवक योगिान की अवभिािा एिं आत्म-वसखद्ध
| के | मागव को पोवित वकया िा सके; |
|---|---|
| (ट) तीव्र गवत से विकवसत हो रहे एिं पररिवतवत होते समाि में ज्ञान के | अिवन को बढ़ािा िेना |
तथा निीन एिं भािी प्रौद्योवगवकयों में सतत ज्ञान-िृखद्ध, प्रविक्षण एिं कौिि संिधवन के अिसर उपिि कराना तावक एक अवधगमिीि समाि की अिधारणा को साकार वकया िा सके; (ठ) राष्ट र ीय एकता, बंधुता की भािना को बढ़ािा िेना, सांस्कृ वतक धरोहर का संरक्षण करना
| एिं विवभन्न धमों, सावहत्य, इवतहास, विज्ञान, किा, सभ्यताओं एिं संस्कृ वतयों के | अध्ययन | ||
|---|---|---|---|
| के | माध्यम से भारत के | विविध धमों एिं संस्कृ वतयों के | प्रवत सिान की भािना विकवसत |
करना;
(ड) राज्य अथिा वनिी उद्योगों, सरकारी संगठनों के स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट
र ीय एिं िैवश्वक स्तर पर विक्षण, प्रविक्षण एिं संबंवधत कायविमों, अनुसंधान एिं विकास गवतविवधयों तथा संसाधन उत्पािक सेिाओं के िागत कु िि ढंग से वियान्वयन द्वारा वित्तीय आत्मवनभवरता को स्थावपत करना; (ढ) रोिगारोन्मुख आत्मवनभवर पाठ्यिमों की िुरुआत, परामिव सेिाओं, राज्य सरकार के
| साथ सहयोग, अनुसंधान-कें वद्रत औद्योवगक संपकों एिं अन्य सविय उपायों के | माध्यम से | |
|---|---|---|
| वित्तीय आत्मवनभवरता के | विए प्रयास करना; | |
| (ण) विवभन्न विश्वविद्याियों, संस्थानों, संबंवधत विश्वविद्यािय के | अधीन आनेिािे महाविद्याियों, | |
| राज्य, क्षेत्र, िेि, अथिा विश्व के | अन्य विश्वविद्याियों के | बीच बेहतर संिाि एिं समन्वय को |
| सामान्यतः समग्र रूप से विश्वविद्यािय प्रिासन एिं उच्च विक्षा के | विए उपिि कराई | |
| िानेिािी सुविधाओं में सुधार करने के | विए प्रोत्साहन िेना; | |
| (त) समाि के | कमिोर िगों में आत्म-सिान एिं गररमा की भािना उत्पन्न करना एिं उसे |
बढ़ािा िेना; (थ) समाि में िैंवगक समानता एिं संिेिनिीिता को प्रोत्सावहत करना; (ि) सभी िैक्षवणक एिं अन्य छात्रों से संबंवधत मामिों में प्रवतस्पधावत्मक योग्यता एिं उत्कृ ष्टता
को एकमात्र मागवििवक वसद्धांत के रूप में स्थावपत करना;
(ध) अकािवमक िे वडट बैंक
- (ABC)में पंिीकरण करना, िो अकािवमक उद्देश्यों के विए राष्ट र
ीय स्तर की एक सुविधा होगी, िहाँ विद्याथी अकािवमक खाताधारक के रूप में
पंिीकृ त होंगे; (न) विवभन्न रणनीवतयों एिं पहिों को विकवसत करना तथा अन्तरावष्ट र ीय स्तर पर विश्वविद्यािय की पहचान एिं प्रभाि को विस्तृत करने हेतु पाठ्यिमों का िैवश्वक महत्व, राज्य
| विश्वविद्याियों का प्रचार-प्रसार, वििेिी विश्वविद्याियों के | साथ अकािवमक एिं अनुसंधान | |
|---|---|---|
| सहयोग, संयुि पाठ्यिमों के | तहत िे वडट मान्यता, िैवश्वक नागररकता दृवष्टकोण एिं | |
| वििेिी पूिव छात्रों के | साथ सहभावगता िैसी गवतविवधयों के | माध्यम से उच्च विक्षा के |
अन्तरावष्ट र ीयकरण का अिसर प्रिान करना; (प) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग (यूिीसी) द्वारा समय-समय पर वनगवत वकए गए समस्त वनिेिों तथा मानिंडों का पािन करना एिं उनका कायावन्वयन सुवनवित करना; (फ) विश्वविद्यािय को पूणव पारिविवता की भािना को आत्मसात करना होगा तथा वनम्नविखखत िानकारी को सािविवनक सूचना एिं प्रकटन हेतु अपनी िेबसाइट पर सहि रूप से उपिि कराना सुवनवित करना होगा:-
- (i)संस्थान, अवधवनयम एिं पररवनयम तथा उसके संस्थागत विकास योिना के बारे में िानकारी;
- (ii)अंगीभूत एिं संबद्ध महाविद्याियों के िेबसाइट के संपकक धििरि और धलंक, यधद लागू ह ;
- (iii)राष्ट र ीय मूल्ांकन एिं प्रत्यायन पररिि् एन०ए० ए०एसी०, राष्ट र ीय संस्थागत रैंवकंग रूपरेखा एन०आई०आर०एफ़० तथा झारखण्ड राज्य संस्थागत रैंवकं ग रूपरेखा में प्रत्यायन/ रैंवकं ग खस्थवत;
- (iv)यूिीसी के 2(f), 12(b) आवि विवभन्न अनुच्छेिों के अंतगवत स्वायत्तता की मान्यता एिं स्वीकृ वत की खस्थवत;
- (v)प्रमुख प्रिासवनक पिावधकाररयों, विभागाध्यक्षों, सीनेट एिं वसंवडके ट सिस्यों के
विस्तृत प्रोफाइि एिं उनके छायावचत्र;
- (vi)विवभन्न िैक्षवणक कायविमानुसार अनुसंधान एिं विकास हेतु उपिि आधारभूत संरचना और सुविधाओं की िानकारी;
- (vii)प्रिेि नीवत, िुल्क एिं िुल्क िापसी नीवत संबंधी नीवतयाँ;
- (viii)अनुसंधान एिं विकास प्रकोष्ठ संिधवन /निाचार एिं उद्यवमता प्रकोष्ठ, एंटी-रैवगंग
प्रकोष्ठ, समान अिसर प्रकोष्ठ इत्यावि विवभन्न सुविधाओं से संबंवधत िानकारी;
- (ix)विव्यांगिन एिं सामाविक-आवथवक रूप से िंवचत समूहों हेतु उपिि सुविधाएँ;
- (x)संसि् एिं झारखण्ड राज्य विधानमंडि में प्रस्तुत प्रश्ों के उत्तर;
- (xi)विश्वविद्यािय एिं उसके अंगीभूत महाविद्याियों का िाविवक प्रवतिेिन, यवि िागू हो;
- (xii)विश्वविद्यािय एिं उसके अंगीभूत महाविद्याियों का िाविवक प्रवतिेिन एिं खातों की अंके क्षण का वित्तीय वििरण;
- (xiii)विवभन्न विश्वविद्याियों एिं उनके अंगीभूत महाविद्याियों के अंके क्षण प्रवतिेिन;
- (xiv)समय-समय पर िारी पररपत्र एिं कायाविय आिेि;
- (xv)अन्य विभागों / बोडों/ एिेंवसयों / व्यखियों के साथ वकया गया पत्राचार;
- (xvi)समय-समय पर गवठत सवमवतयों से संबंवधत आिेि एिं उन सवमवतयों द्वारा प्रस्तुत प्रवतिेिन; तथा
- (xvii)उच्च विक्षण संस्थानों हेतु सािविवनक आत्म-प्रकटीकरण वििा-वनिेि, 2024
के अनुसार, समय-समय पर संिोवधत कोई भी अन्य आिश्यक िानकारी।