Section 5 of The Jharkhand State University Act, 2026 — विश्वविद्यालय की शक्तियाँ एवं कर्तव्य
Bare section text
Official Legislative Text
विश्वविद्यािय को वनम्नविखखत िखियाँ एिं कतवव्य प्राप्त होंगे, िो वनम्नविखखत विियों से संबंवधत होंगे:—
- (1)विक्षण एिं अवधगम, अथावत् :- (क) विश्वविद्यािय द्वारा उपयुि समझी गई विविध विक्षािाखाओं, विनमें व्यािसावयक अध्ययन एिं प्रौद्योवगकी सखिवित हों, में विक्षण प्रिान करना; (ख) सुव्यिखस्थत, आकिवक एिं अद्यतन पाठ्यिमों का वनमावण एिं उनका संचािन करना; (ग) विविध विक्षण पद्धवतयों का प्रयोग कर सभी विक्षावथवयों की आिश्यकताओं को पूरा करना; (घ) विक्षण पद्धवतयों में निीनतम अनुसंधान वनष्किों को समावहत करना; (ङ) विद्यावथवयों को आिोचनात्मक वचंतन, समस्या-समाधान तथा व्यािसावयक कौििों से सुसखित करना;
| (च) यह सुवनवित करना वक विक्षण प्रणािी प्रत्यायन एिं संस्थागत मानकों के | अनुरूप हो; | ||||||||
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| (छ) अंतविवियक विक्षण हेतु विवभन्न विभागों के | मध्य सहयोग को बढ़ािा िेना; | ||||||||
| (ि) अपने | अवधकारक्षेत्र | के | अंतगवत | क्षेत्रीय | के न्द्ों, अध्ययन | के न्द्ों | और | सामुिावयक महाविद्याियों की स्थापना के | विए आिश्यकतानुसार मूल्ांकन करना; |
(झ) समािेिी एिं समान गुणित्तायुि विक्षण िातािरण को प्रोत्सावहत करना; तथा
(ञ) बाह्य संगठनों के साथ भागीिारी कर व्यािहाररक अवधगम के अिसर उपिि कराना।
- (2)अनुसंधान एिं सहयोग, अथावत् :-
(क) अनुसंधान, ज्ञान संिधवन एिं प्रसार की व्यिस्था करना तथा सामान्य रूप से किा (िवित किा एिं प्रििवन किा सवहत), मानविकी, सामाविक विज्ञान, िेखा एिं िावणज्य, िुद्ध एिं अनुप्रयुि विज्ञान, ितवमान एिं उभरती हुई प्रौद्योवगवकयाँ, प्रबंधन, वचवकत्सा की विवभन्न प्रणावियाँ, अवभयांवत्रकी, विवध, िारीररक विक्षा एिं अन्य विक्षािाखाओं तथा इनके बहुविियक एिं अंतविवियक क्षेत्रों को विकवसत एिं प्रोत्सावहत करना;
(ख) अनुसंधान संस्थानों एिं विविष्ट अध्ययन संस्थानों की स्थापना, अनुरक्षण एिं संचािन करना;
| (ग) अध्ययन कें द्रों की स्थापना करना तथा राज्य सरकार अथिा विश्वविद्यािय अनुिान आयोग (यूिीसी) द्वारा वनधावररत वििावनिेिों के | अनुसार उन अध्ययन कें द्रों में संसाधन कें द्रों की व्यिस्था करना, विनमें स्नातकोत्तर विभाग, पुस्तकािय, प्रयोगिािाएँ, कं प्यूटर कें द्र एिं अन्य विक्षण एिं कौिि विकास कें द्र सखिवित हों; | ||
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| (घ) विद्यावथवयों की मांग एिं प्रिासवनक आिश्यकताओं के | आधार पर विश्वविद्यािय पररसर एिं/अथिा अध्ययन कें द्रों एिं/अथिा क्षेत्रीय के न्द्ों की स्थापना की व्यिस्था करना; | ||
| (ङ) अनुसंधान एिं परामिव सेिाओं के | विए वकसी अन्य विश्वविद्यािय, संस्थान, प्रावधकरण अथिा संगठन के | साथ सहयोग करना या सहभावगता करना तथा आिश्यकतानुसार पाठ्यिमों के | संचािन हेतु उपयुि समायोिन करना; |
| (च) विश्वविद्यािय की संसाधन िृखद्ध की संभािनाओं का अन्वेिण करना तथा अनुसंधान एिं विकास, परामिव, प्रविक्षण कायविमों एिं औद्योवगक, िावणखज्यक या अन्य गैर-सरकारी संगठनों के | विए सेिाएँ प्रिान करने िैसी निीन गवतविवधयों के | माध्यम से आवथवक संसाधन उत्पन्न करना; | |
| (छ) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग एिं अन्य प्रासंवगक िैधावनक वनकायों द्वारा समय-समय पर िारी विवनयमों के | अनुरूप आत्मवनभवरता प्राप्त करने की दृवष्ट से वििेिी विश्वविद्याियों एिं संस्थानों के | साथ िैक्षवणक सहभावगता कायविम, अनुसंधान एिं परामिव सेिाओं का संचािन करना; | |
| (ि) उच्च विक्षा, अनुसंधान, परामिव-आधाररत पररयोिनाओं एिं बाह्य एिेंवसयों के | प्रविक्षण कायविमों को िुल्क िेकर संचावित करना तावक आन्तररक कोि और अन्य संसाधन उत्पन्न वकए िा सकें; |
(झ) उच्च गुणित्ता िािे अनुसंधान को विकवसत करना, विसका स्वरूप आधुवनक, िैवश्वक स्तर पर प्रवतस्पधावत्मक तथा स्थानीय, क्षेत्रीय एिं राष्टरीय स्तर पर प्रासंवगक हो; (ञ) स्नातक एिं स्नातकोत्तर स्तर पर विक्षा को सिि बनाना, प्रासंवगक पाठ्यिमों में अनुसंधान संस्कृ वत को बढ़ािा िेना एिं उद्यमिीिता हेतु रुवच उत्पन्न करना; तथा
(ट) अनुसंधान पाकव, तकनीक संिधवक एिं अन्य संिग्न संस्थाओं की स्थापना करना तावक विश्वविद्यािय द्वारा वकए गए अनुसंधान को व्यािसावयक क्षेत्र में रूपांतररत वकया िा सके तथा विवभन्न विियों के विक्षकों के सखिवित प्रयासों द्वारा राज्य के समक्ष उपखस्थत महत्त्वपूणव समस्याओं का समाधान वकया िा सके ।
- (3)कवमवयों की वनयुखि एिं प्रोन्नवत, अथावत् :- (क) धिश्वधिद्यालय के अधिकाररय ं, धिदेशक ं, प्रधानाचायों, धशक्षक ं, विक्षके त्तर कमकचाररय ं और अन्य पद ं पर पररधियम ं द्वारा धििाकररत तरीके से धियुक्तियाँ करिा;
(ख) पररवनयमों में वनविवष्ट अहवताओं एिं अनुभि के अनुसार विश्वविद्यािय कवमवयों की प्रोन्नवत करना;
(ग) प्रत्येक ििव 31 विसंबर तक िैक्षवणक, गैर-िैक्षवणक एिं अन्य स्वीकृ त पिों की ररखियों का विश्लेिण करना तथा समयबद्ध वनयुखि हेतु रोस्टर तैयार करना;
| (घ) पररवनयमों में वनधावररत प्रविया के | अनुसार कमवचाररयों को अंतर-विश्वविद्यािय स्थानांतरण की सुविधा प्रिान करना; | ||||||||||
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| (ङ) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग (यूिीसी) एिं अन्य संबंवधत संस्थानों के | सहयोग से मानि संसाधन विकास कें द्र की स्थापना करना, विससे कमवचाररयों के | सिाांगीण प्रविक्षण की व्यिस्था हो सके; | |||||||||
| (च) झारखण्ड स्टेट फै कल्टी डेििपमेंट एके डमी के | सहयोग से प्रिेि प्रविक्षण, कै ररयर विकास कायविम, कौिि संिधवन कायविम एिं कायविािाएँ आयोवित करना; | ||||||||||
| (छ) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग (यूिीसी) एिं पररवनयमों में वनविवष्ट मानिंडों के | अनुसार विक्षकों के | प्रििवन का समय समय पर मूल्ांकन करना; | |||||||||
| (ि) पररवनयमों में वनधावररत मानिंडों के | अनुसार विक्षके त्तर कमवचाररयों के | प्रििवन का समय समय पर मूल्ांकन करना; | |||||||||
| (झ) विक्षकों के | विवनमय कायविम, संयुि सहयोग एिं अनुसंधान हेतु िैक्षवणक एिं अनुसंधान संस्थानों के | साथ सहभावगता स्थावपत करना; | |||||||||
| (ञ) विक्षण अथिा कायव अिवध में विश्वविद्यािय या महाविद्यािय पररसर में कमवचाररयों की उपखस्थवत को वनविवष्ट मानकों के | अनुसार विवनयवमत एिं वनगरानी करना; तथा | ||||||||||
| (ट) पररवनयमों | अथिा | वनयमों | के | अंतगवत | वनवमवत | आचरण | एिं | अनुिासन | वनयमों | को कमवचाररयों के | विए िागू करना। |
- (4)विद्यावथवयों की इंटनवविप, अप्रेंवटसविप एिं प्लेसमेंट, अथावत् :-
| (क) प्रमाणपत्र, वडप्लोमा, उपावध अथिा अन्य वकसी भी िैक्षवणक अहवता में इंटनवविप को अवनिायव घटक | के | रूप में समावहत करना; | ||
|---|---|---|---|---|
| (ख) उद्योग वनकायों के | साथ भागीिारी, समझौते तथा समझौता ज्ञापन/एम.ओ.यू. के | माध्यम से सभी विद्यावथवयों के | विए पयावप्त इंटनवविप एिं अप्रेंवटसविप के | अिसर प्रिान करना; |
| (ग) विद्यावथवयों की इंटनवविप, अप्रेंवटसविप एिं प्लेसमेंट पर कें वद्रत एक समवपवत बोडव, कायाविय अथिा प्रकोष्ठ | की स्थापना करना; | |||
| (घ) भारत सरकार अथिा राज्य सरकार द्वारा िागू वनयमों के | अनुरूप विश्वविद्यािय के | आिश्यकतानुसार प्रविक्षुओं एिं उन्नत प्रविक्षुओं की पहचान, विज्ञापन एिं योग्यता-आधाररत चयन प्रविया के | माध्यम से उनकी संिग्नता सुवनवित करना; | |
| (ङ) विश्वविद्यािय अनुिान आयोग अथिा अन्य वकसी वनयामक वनकाय द्वारा िागू मानकों के | अनुसार उपयुि औद्योवगक भागीिारों के | सहयोग से अप्रेंवटसविप-समाविष्ट उपावध कायविमों की िुरुआत करना; | ||
| (च) विद्यावथवयों की रोिगार क्षमता | को बढ़ाने हेतु वििेिीकृ त पाठ्यिमों | की िुरुआत करना; | ||
| (छ) विद्यावथवयों के | पारििी एिं योग्यता-आधाररत प्लेसमेंट | हेतु नीवत का वनमावण करना; | ||
| (ि) स्थानीय आिश्यकताओं, उपिि प्रविक्षण सुविधाओं, उभरती आिश्यकताओं एिं निीन रोिगार के | अिसरों को ध्यान में रखते हुए विद्यावथवयों को प्रविवक्षत वकए िाने योग्य कौििों की पहचान करना; तथा | |||
| (झ) विद्यावथवयों की रोिगार क्षमता | सुवनवित करने हेतु पाठ्यिम को वनयवमत रूप से अद्यतन करना। |
- (5)विश्वविद्यािय की वित्तीय व्यिस्थाएँ, अथावत् :-
| (क) राज्य सरकार की पूिावनुमवत से विश्वविद्यािय की संपवत्त को प्रवतभूवत के | रूप में रखकर विश्वविद्यािय के | उद्देश्यों की पूवतव हेतु वनवधयों का उधार | िेना; | |||
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| (ख) भारत सरकार एिं राज्य सरकार द्वारा इस संिभव में िागू वनयमों के | अधीन रहकर वििेिी संस्थाओं | से सहयोगी कायविमों हेतु वनवधयों की प्राखप्त करना; | ||||
| (ग) विश्वविद्यािय द्वारा विक्षण, अवधगम, प्रविक्षण, अनुसंधान, उभरते तकनीकों, निप्रितवन, स्टाटवअप, परामिव एिं अन्य िैक्षवणक एिं सहायक गवतविवधयों के | माध्यम से उत्पन्न अवधिेि से विकास वनवध कोि का वनमावण करना, उसे व्यािसावयक रूप से वनिेवित करना तथा उससे उत्पन्न ब्याि को िैक्षवणक, अनुसंधान एिं विकास, िैक्षवणक एिं भौवतक आधारभूत संरचना के | विकास तथा अन्य आधारभूत संरचनात्मक गवतविवधयों के | संिधवन हेतु प्रयोग करना; | |||
| (घ) विश्वविद्यािय के | आन्तररक कोि सृिन के | विए एक रणनीवतक कायवयोिना तैयार करना, विसमें उद्योग-अकािवमक सहयोग, अनुसन्धान एिं परामिव पररयोिनायें, पूिव छात्रों का योगिान | और | िान, विक्षा | का अंतरावष्टरीय करण, बौखद्धक सम्पिा और | प्रौद्योवगकी हस्तांतरण, स्टाटवअप प्रोत्साहन एिं इंक्यूबेिन आवि गवतविवधयाँ िावमि हों; |
| (ङ) विश्वविद्यािय की आन्तररक वनवधयों से स्व-वित्तपोवित पाठ्यिमों की िुरुआत करना, संचावित करना या उन्हें बंि करना तथा ऐसे पाठ्यिमों के | विए आिश्कतानुसार विक्षक एिं विक्षके त्तर कमवचाररयों की विवनविवष्ट तरीके | से वनयुखि एिं भती करना; | ||||
| (च) राज्य सरकार की वकसी प्रकार की भागीिारी या अंििान के | वबना, िेि के | भीतर विवभन्न वित्तपोिक एिेंवसयों से अनुिान प्राप्त कर व्यय करना तथा व्यखियों, उद्योगों, संस्थानों, संगठनों या वकसी अन्य व्यखि से विश्वविद्यािय के | उद्देश्यों की पूवतव हेतु प्राप्त अंििान अथिा विश्वविद्यािय द्वारा प्रित्त िैक्षवणक अथिा अन्य सेिाओं के | एिि में प्राप्त िुल्क को सहायता प्राप्त अथिा स्वयंवित्तपोवित िैक्षवणक कायविमों के | विए व्यय करना; तथा | |
| (छ) विकास कोि या विश्वविद्यािय द्वारा स्थावपत वकसी अन्य कोि से इन प्रयोिनों के | विए व्यय वकया िा सके गा वक विवभन्न श्रेवणयों में पिों का सृिन वकया िा सके, उन पिों के | विए िेतन भत्ते एिं अन्य िाभ प्रिान वकए िा सके, बिते वक ऐसे पि उन व्यखियों द्वारा नहीं धाररत हों िो ऐसे पिों पर कायवरत हैं विनके | विए सरकार से अनुिान प्राप्त होता है; स्व-वित्तपोवित आधार पर वकसी भी िैक्षवणक कायविम का प्रारम्भ वकया िा सके; कमवचाररयों को उनके | वनयवमत कतवव्यों के | विए पाररश्रवमक या प्रोत्साहन विया िा सके; तथा छात्रों और कमवचाररयों के | कल्ाण हेतु विकास कायों एिं अन्य गवतविवधयों पर व्यय वकया िा सके । |
- (6)समािेिी विक्षा को बढ़ािा िेना, अथावत् :-
| (क) सामाविक एिं िैवक्षक रूप से वपछड़े िगों एिं समुिायों, छात्राओं, विव्यांगिन विद्यावथवयों तथा ग्रामीण एिं िनिातीय क्षेत्रों के | विद्यावथवयों को विश्वविद्याियीय विक्षा के | िाभ उपिि कराने हेतु वििेि प्रािधानों की व्यिस्था करना; |
|---|---|---|
| (ख) िंवचत िगों से संबंवधत विद्यावथवयों हेतु विि पाठ्यिमों की िुरुआत करना, विससे िह उच्च विक्षा के | विए आिश्यक िैवक्षक योग्यता प्राप्त कर सकें; | |
| (ग) िैक्षवणक रूप से कमिोर विद्यावथवयों के | विए सहायक उपचारात्मक पाठ्यिमों को प्रोत्सावहत करना; तथा |
(घ) मवहिा विक्षकों, विक्षके त्तर कमवचाररयों एिं विद्यावथवयों की पूणव सुरक्षा सुवनवित करने हेतु आधारभूत संरचनात्मक, तकनीक-आधाररत एिं सामाविक उपाय अपनाना।
- (7)विश्वविद्यािय का संचािन, अथावत् :- (क) विश्वविद्यािय विभागों, अध्ययन के न्द्ों, संस्थानों, प्रयोगिािाओं, अध्ययन संसाधन कें द्रों, पुस्तकाियों, संग्रहाियों तथा विक्षण, अवधगम, प्रविक्षण, अनुसंधान एिं विकास तथा प्रसार से संबंवधत उपकरणों की व्यिस्था, अनुरक्षण एिं प्रबंधन करना; (ख) छात्रािासों, स्वास्थ्य कें द्रों, प्रेक्षागृहों, विद्याथी संसाधन कें द्रों, व्यायामिािाओं एिं अन्य विद्याथी संबंधी गवतविवधयों का स्थापन, अनुरक्षण एिं संचािन करना; (ग) छात्रों और कमवचाररयों की सुरक्षा एिं संरक्षा हेतु आिश्यक बुवनयािी ढाँचे की स्थापना करना और सम्बंवधत कमवचाररयों की वनयुखि करना;
| (घ) विश्वविद्यािय द्वारा वनधावररत अवधकार क्षेत्र में प्रिासवनक और प्रसार गवतविवधयों के | विकें द्रीकरण हेतु चयवनत अंगीभूत महाविद्याियों को विश्वविद्यािय के | क्षेत्रीय के न्द्ों में उन्नत वकया िाना; | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| (ङ) विविष्ट उपावधयों, वडप्लोमा अथिा प्रमाणपत्रों के | विए विविध परीक्षाओं हेतु पाठ्यिमों का वनधावरण करना; | |||||
| (च) िहाँ संभि हो, विश्वविद्यािय विभागों, महाविद्याियों एिं संस्थानों में राज्य एिं राष्टरीय योिनाओं सवहत विवभन्न विकासात्मक गवतविवधयों से संबंवधत संख्या, आँकड़ों एिं अन्य वििरणों के | सिेक्षण एिं संकिन की व्यिस्था करना, विससे विद्याथी पाठ्यिमीय गवतविवधयों के | रूप में इन विकासात्मक योिनाओं के | मूल्ांकन में भाग िे सकें; | |||
| (छ) विश्वविद्यािय | विभागों, अंगीभूत | महाविद्याियों | तथा संबद्ध महाविद्याियों | में | विवभन्न पाठ्यिमों हेतु विद्यावथवयों के | प्रिेि का पयविेक्षण, वनयंत्रण एिं विवनयमन करना; |
| (ि) िैक्षवणक कै िेंडर तैयार करना एिं उसके | कठोर अनुपािन को सुवनवित करना; |
(झ) पररवनयमों में वनविवष्ट मानि उपावधयाँ अथिा अन्य अकािवमक विविष्टताएँ प्रिान करना; (ञ) विश्वविद्यािय पररसर में अनुिासन एिं सौहािवपूणव िातािरण को बनाए रखना;
| (ट) राज्य सरकार अथिा/ एिं भारत सरकार द्वारा विश्वविद्यािय के | उद्देश्यों की पूवतव हेतु आिश्यकतानुसार वनिेवित सांस्कृ वतक, आवथवक एिं सामाविक कल्ाणकारी कायविमों, सेिाओं एिं गवतविवधयों में विद्यावथवयों की भागीिारी की व्यिस्था करना; | |
|---|---|---|
| (ठ) स्वयं अथिा अन्य विश्वविद्याियों एिं संगठनों के | सहयोग से क्षेत्रीय, राष्टरीय एिं वििेिी भािाओं के | अध्ययन को बढ़ािा िेना; |
| (ड) अपने कमवचाररयों के | उत्तरिावयत्व सुवनवित करने हेतु संचािन योिना विकवसत करना; |
(ढ) विद्याथी-कें वद्रत दृवष्टकोण अपनाना एिं ज्ञान सृिन की भूवमका का वनिवहन करना; (ण) ई-विक्षण एिं ई-प्रिासवनक सेिाओं हेतु एक व्यापक वडविटि विश्वविद्याियीय रूपरेखा तैयार करना;
| (त) सूचना एिं संचार प्रौद्योवगकी | के | उपयोग से ‘सहभावगता द्वारा विक्षण’ एिं ‘भागीिारी’ की अिधारणा को सिि बनाना; |
|---|---|---|
| (थ) राष्टर की समृद्ध सांस्कृवतक विरासत से पररवचत कराने एिं खेिकूि में कौिि विकवसत करने के | अिसर प्रिान कर युिाओं के | सिाांगीण विकास हेतु अनुकू ि िातािरण तैयार करना; |
| (ि) विश्वविद्यािय की िखियों, कतवव्यों एिं उत्तरिावयत्वों के | संबंध में समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा िारी वनिेिों का अनुपािन एिं वियान्वयन; | |
| (ध) वनयवमत अंतराि पर विश्वविद्यािय के | विभागों एिं संबंवधत इकाइयों का अकािवमक मूल्ांकन करना; | |
| (न) बाह्य विद्यावथवयों तथा पत्राचार एिं िूरस्थ विक्षा, ऑनिाइन विक्षा एिं सतत विक्षा पाठ्यिमों के | विद्यावथवयों विए उपावधयाँ, वडप्लोमा एिं प्रमाणपत्र प्रिान करना, एिं व्याख्यान, विक्षण एिं प्रविक्षण की व्यिस्था करना; | |
| (प) विश्वविद्यािय एिं उसकी अंगीभूत इकाइयों में ‘हररत अंके क्षण’ को िाविवक रूप से सुवनवित करना, विससे ऊिाव िक्षता के | उच्चतम स्तर को प्राप्त वकया िा सके; | |
| (फ) विश्वविद्यािय के | उद्देश्यों की प्राखप्त हेतु आिश्यक, आनुिांवगक अथिा अन्य समस्त अनुकू ि कायों एिं उपायों को अपनाना; तथा |
(ब) उप-धारा
- (1)से उप-धारा
- (7)के अंतगवत उखिखखत कतवव्यों का वनिवहन करने के विए विश्वविद्यािय आिश्यकतानुसार िे.एस.एफ़.डी.ए./िे.एस.एच.ई.सी./िे.सी.एस.टी.आई. से परामिव कर सकता है।
- (8)इस अवधवनयम की अनुसूची-II में उखिखखत विश्वविद्यािय इस अवधवनयम की अनुसूची-II में सूचीबद्ध विश्वविद्याियों को अवतररि उत्तरिावयत्व एिं िखियाँ प्रिान की गई हैं, अथावत् :- (क) अंगीभूत एिं संबद्ध महाविद्याियों की स्थापना को सक्षम बनाने हेतु वििेिीकृ त अध्ययन हेतु प्रािधान करना;
| (ख) स्वायत्त, सिि स्वायत्त एिं सिि स्वायत्त संकु ि संस्थानों के | वनमावण हेतु प्रािधान करना; | |||
|---|---|---|---|---|
| (ग) विश्वविद्यािय की आिश्यकताओं के | अनुसार अध्ययन कें द्र या क्षेत्रीय अध्ययन कें द्र स्थावपत करना, विनका स्पष्ट भौगोविक अवधकार क्षेत्र और वनधावररत उत्तरिावयत्व हो; | |||
| (घ) विश्वविद्यािय अथिा महाविद्यािय में अनुमोवित पाठ्यिमों का अध्ययन करने िािे एिं वनधावररत परीक्षाएँ उत्तीणव कर आिश्यक िे वडट, अंक अथिा ग्रेड अविवत करने िािे विद्यावथवयों के | विए परीक्षा आयोवित करना, मूल्ांकन करना एिं प्रमाणपत्र, वडप्लोमा, उपावधयाँ, स्नातकोत्तर वडप्लोमा एिं अन्य अकािवमक विविष्टताएँ प्रिान करना; | |||
| (ङ) महाविद्याियों की संबद्धता की ितें एिं संस्थानों की मान्यता की ितें वनधावररत करना, विसमें प्रबंधन की विश्वसनीयता, महाविद्याियों, संकायों एिं विियों की िैक्षवणक गुणित्ता के | मानिंडों को ध्यान में रखा िाएगा, िैसा वक समय-समय पर पररवनयमों तथा वनयमों द्वारा वनधावररत वकया िाए; | |||
| (च) विश्वविद्यािय के | वििेिावधकारों के | अंतगवत संबद्ध अथिा अंगीभूत महाविद्याियों एिं संस्थानों को सखिवित करना एिं उनके | वकसी भी वििेिावधकार को अस्थायी अथिा स्थायी रूप से िापस िेना; | |
| (छ) अंगीभूत महाविद्यािय, संबद्ध महाविद्यािय, संस्थान को स्वायत्त अंगीभूत महाविद्यािय, स्वायत्त संबद्ध महाविद्यािय अथिा स्वायत्त संस्थान के | रूप में एकि अथिा संकु ि रूप में नावमत करना, िैसा वक पररवनयमों में वनविवष्ट वििावनिेिों के | अनुसार वनधावररत वकया िाए; | ||
| (ि) अंगीभूत एिं संबद्ध महाविद्याियों में विवभन्न पाठ्यिमों हेतु विद्यावथवयों के | प्रिेि का पयविेक्षण, वनयंत्रण एिं विवनयमन करना; | |||
| (झ) विश्वविद्यािय विभागों, विश्वविद्यािय संस्थानों, संघटक एिं संबद्ध महाविद्याियों, स्वायत्त अथिा सिि स्वायत्त महाविद्याियों की िैक्षवणक गुणित्ता की वनगरानी एिं मूल्ांकन करना, िो वक संबद्धता अथिा मान्यता के | विए आिश्यक होगा, तथा इन संस्थानों को राज्य, राष्टरीय एिं िैवश्वक प्रत्यायन/रैंवकं ग के | विए मूल्ांकन हेतु प्रस्तुत करना; | ||
| (ञ) विश्वविद्यािय एिं महाविद्याियों के | विक्षकों एिं विद्यावथवयों हेतु छात्रिृवत्त, विक्षािृवत्त, अनुिान, यात्रा अनुिान, पिक एिं पुरस्कार प्रिान करने हेतु न्यास एिं बंिोबस्ती वनवधयों की स्थापना एिं प्रबंधन करना; | |||
| (ट) सभी प्रकार के | महाविद्याियों एिं संस्थानों का वनरीक्षण करने हेतु एक उपयुि तंत्र स्थावपत करना एिं यह सुवनवित करने हेतु आिश्यक किम उठाना वक ये संस्थान विक्षण, अध्यापन, अवधगम, प्रविक्षण, अनुसंधान एिं प्रसार के | उवचत मानकों का पािन करें तथा इनके | पास पयावप्त पुस्तकािय, कक्षाएँ, प्रयोगिािाएँ, छात्रािास, कायविािाएँ एिं अन्य िैक्षवणक सुविधाएँ | उपिि हों; |
(ठ) महाविद्याियों, संस्थानों अथिा संकु ि संस्थानों को िी गई संबद्धता, मान्यता अथिा सिि स्वायत्त खस्थवत को वनरस्त या वनिंवबत करना;
| (ड) यवि | वकसी | संबद्ध/अंगीभूत | महाविद्यािय, संस्थान, स्वायत्त | अथिा | सिि | स्वायत्त महाविद्यािय या संकु ि संस्थान में प्रबंधन द्वारा वकसी भी आपरावधक कृ त्य अथिा अवनयवमतता के | प्राथवमक साक्ष्य उपिि हों, तो उस महाविद्यािय अथिा संस्थान के | प्रबंधन को उवचत विवधक प्रविया के | अनुसार | एिं राज्य सरकार की पूिव स्वीकृ वत | से वकसी अन्य प्रबंधन को हस्तांतररत करना; तथा |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| (ढ) विश्वविद्यािय, महाविद्याियों एिं संस्थानों में विक्षकों, गैर-विश्रामािकािी िैक्षवणक एिं विक्षके त्तर कमवचाररयों के | उत्तरिावयत्व सुवनवित करने हेतु एक प्रभािी संचािन योिना विकवसत करना। |