Section 5 of The Salary, Allowances and Pension of Members of Parliament Act, 1954 in hindi
मध्यवर्ती यात्रा के लिए यात्रा भत्ता
[(1)] जहां कोई संसद् के किसी सदन के सत्र या किसी समिति की बैठक के दौरान भारत में किसी स्थान को जाने के लिए पंद्रह दिन से कम अवधि के लिए अनुपस्थित रहता है, वहां वह ऐसे स्थान को, ऐसी यात्रा के लिए और ऐसे स्थान से वापसी यात्रा के लिए--
(क) यदि यात्रा रेल द्वारा की जाती है तो प्रत्येक ऐसी यात्रा के लिए चाहे सदस्य ने, वास्तव में यात्रा किसी भी दर्ज से की हो, “पहले दर्जे के एक टिकट] के किराए के बरावर;
(ख) [यदि यात्रा जो समिति की किसी बैठक के दौरान की गई कोई यात्रा है] वायुमार्ग द्वारा की जाती है तो, प्रत्येक ऐसी यात्रा के लिए वायुमार्ग के एक टिकट के किराए के बराबर, यात्रा भत्ता पाने का हकदार होगा : परन्तु ऐसे यात्रा भत्ते, ऐसे दैनिक भत्तों की कुल रकम से अधिक नहीं होंगे, जो यदि वह सदस्य इस प्रकार अनुपस्थित नहीं
रहता, तो अनुपस्थिति के दिनों के लिए धारा 3 के अधीन उसे अनुज्ेय होते :
2000 के अधिनियम सं ० 7 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
2 2006 के अधिनियम सं ० 40 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
२ 2004 के अधिनियम सं० 9 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
4 ।1958 के अधिनियम सं० 55 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित ।
5 |1976 के अधिनियम सं ० 05 की धारा 5 द्वारा (9-9-976 से) धारा 5 उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित ।
6 |1955 के अधिनियम सं० 9 की धारा 2 द्वारा (-4-955 से) “दूसरे दर्ज के एक टिकट का किराया” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । 7 1985 के अधिनियम सं० 74 की धारा 3 द्वारा प्रतिस्थापित ।
"परन्तु यह और कि पहले परंतुक की कोई बात वहां लागू नहीं होगी जहां सदस्य समिति की किसी बैठक के दौरान एक से अनधिक बार भारत में किसी स्थान को जाने के लिए वायु मार्ग से यात्रा करता है]--
'[(क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य किसी विभाग से संबंधित स्थायी समिति की दो बैठकों के बीच थूपांच दिन] से अनधिक के ऐसे अंतराल के दौरान जब संसद्का कोई सदन बजट सत्र के दौरान नियत अवधि के लिए स्थगित कर दिया जाता है, भारत में किसी स्थान को जाने के लिए वायु मार्ग द्वारा की गई प्रत्येक यात्रा के लिए यात्रा भत्ते पाने का हकदार होगा :] परन्तु ऐसे यात्रा भत्ते, वायुयान के किराए को छोड़कर, ऐसे दैनिक भत्तों की कुल रकम से अधिक नहीं होंगे, जो यदि वह
सदस्य अनुपस्थित नहीं रहता तो अनुपस्थिति के दिनों के लिए धारा 3 के अधीन उसे अनुज्ञेय होते ।
अू(2) प्रत्येक सदस्य ऐसे सदस्य की हैसियत में अपनी पदावधि के दौरान, भारत में किसी स्थान से भारत में किसी अन्य स्थान को अपने द्वारा शूअकेले या पति या पत्नी के साथ या साथियों या नातेदारों की किसी संख्या के साथ) की गई वायुमार्ग द्वारा प्रत्येक 'एकतरफा यात्रा के लिए जो धारा 4 या इस धारा की उपधारा (1) के दूसरे परन्तुक या धारा 6ग में निर्दिष्ट यात्रा से भिन्न है वायुमार्ग के किराए के बराबर रकम पाने का हकदार होगा :
अपरंतु इस उपधारा के अधीन ऐसी यात्राओं की कुल संख्या प्रतिवर्ष चौंतीस यात्राएं होगी :]
[परन्तु यह और कि जहां किसी सदस्य द्वारा वायु मार्ग द्वारा की गई यात्राओं की संख्या '[चौंतीस से कम] है, वहां उसके द्वारा न की गई ऐसी यात्राओं की संख्या आगामी वर्ष के लिए अग्रनीत हो जाएंगी :]
गपंरतु यह भी कि किसी सदस्य का/की, यथास्थिति, पत्नी/पति या साथी अकेला/अकेली भारत में किसी स्थान से भारत में किसी ऐसे स्थान को, ऐसे सदस्य से भेंट करने के प्रयोजन के लिए वायु मार्ग द्वारा अधिकतम आठ यात्राए कर सकेगा/सकेगी और ऐसी यात्रा उपधारा (2) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट [चौंतीस यात्राओं] की गणना करने के प्रयोजन के लिए सम्मिलित की जाएगी :]
[परंतु यह और भी कि यदि कोई सदस्य वर्ष में उसे अनुज्ञेय ऐसी चौंतीस यात्राओं से अधिक यात्राएं वायु मार्ग द्वारा करता है तो उसे आठ से अनधिक ऐसी यात्राओं को उन यात्राओं की संख्या से जिनका वह हकदार होगा जो ठीक बाद के वर्ष में उसके खाते में प्रोदूभूत हों, समायोजित करने के लिए, अनुज्ञात किया जा सकेगा ।]
"[(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे सदस्य को, जो, यथास्थिति, राज्य सभा के सभापति या लोक सभा के अध्यक्ष की राय में, शारीरिक रूप से इतना असमर्थ है कि वह वायु मार्ग या रेलगाड़ी से यात्रा नहीं कर सकता है, पूर्ण सड़क यात्रा के लिए मील भत्ता दिया जाएगा ।]
स्पष्टीकरण -- धारा 4 की उपधारा (1) के रूश८ड (ग) और उपधारा (2) के उपबंध यावत्शक्य, इस धारा के अधीन संदेय यात्रा भत्तों को वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उस धारा के अधीन संदेय यात्रा भत्तों को लागू होते हैं ।
स्पष्टीकरण 2--इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “वर्ष” से अभिप्रेत है-
- (1)किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जो संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 985 के प्रारंभ पर सदस्य है, ऐसे प्रारंभ से शुरू होने वाला वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती वर्ष;
- (1)किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जो ऐसे प्रारंभ के पश्चात् सदस्य बनता है, ऐसी तारीख से जिसको ऐसे सदस्य के रूप में उसकी पदावधि प्रारंभ होती है, शुरू होने वाला वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती वर्ष । शूस्पष्टीकरण--3 उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, [पति या पत्नी, साथियों या नातेदारों द्वारा की गई कोई यात्रा उस धारा के पंरतुक में विनिर्दिष्ट श[चौंतीस यात्राओं] की संगणना करने में जोड़ी जाएगी । '5क. मार्गस्थ वास-सुविधा-- जहां धारा 4 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट व्यक्ति दिल्ली आता है, वहां वह ऐसी मार्गस्थ वास- सुविधा के लिए ऐसी अवधि के लिए, जो संयुक्त समिति द्वारा धारा 9 की उपधारा (3) के खंड (गगग) के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए, हकदार होगा ।] ' 1995 के अधिनियम सं० 8 की धारा 2 द्वारा (-4-995 से) अंतःस्थापित । 2 2006 के अधिनियम सं ० 40 की धारा 4 द्वारा प्रतिस्थापित । 3 |1995 के अधिनियम सं० 8 की धारा 2 द्वारा (-4-995 से) अंतःस्थापित ।
- 1999 के अधिनियम सं० 6 की धारा 2 द्वारा (22-3-999 से) कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । 5 2006 के अधिनियम सं ० 40 की धारा 4 द्वारा प्रतिस्थापित ।
- ।1998 के अधिनियम सं० 28 की धारा 4 द्वारा प्रतिस्थापित । 7 2004 के अधिनियम सं० 9 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 2006 के अधिनियम सं ० 40 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1993 के अधिनियम सं० 3 की धारा 2 द्वारा अंत:स्थापित । ।" 2004 के अधिनियम सं० 9 की धारा 5 द्वारा अंतःस्थापित । |