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Section 5 of The Bird and Company Limited (Acquisition and Transfer of Undertakings and Other Properties) Act, 1980 in hindi
निहित होने का साधारण प्रभाव
- (1)कम्पनी के उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत सभी आस््तियां, अधिकार, पट्टाधूतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम संपत्ति, जिसके अन्तर्गत भूमियां, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर, रोकड़ बाकी, हाथ की रोकड़, आरक्षित निधियां, विनिधान, बही-ऋण और ऐसी सम्पत्ति में या उससे उद्भूत होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो नियत दिन के ठीक पूर्व कम्पनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे, और तत्संबंधी किसी भी प्रकार की सभी लेखा-बहियां, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजें हैं ।
- (2)यथापूर्वोक्त सभी सम्पत्तियां, जो धारा 3 या धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के बल पर, किसी भी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी की किसी कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश की बाबत, जो ऐसी सम्पत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्वन्धित करता है, या जो ऐसी समस्त सम्पत्तियों या उनके किसी भाग की बाबत कोई रिसीवर नियुक्त करता है, यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।
- (3)किसी ऐसी सम्पत्ति का ,जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है ,प्रत्येक बन्धकदार और किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके संबंध में कोई भार ,धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ,ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से ,जो विहित की जाए ,ऐसे बन्धक ,भार ,धारणाधिकार या अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा ।
- (4)शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का बन्धकदार या ऐसी किसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार ,धारणाधिकार या अन्य हित रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति, धारा 8 में विनिर्दिष्ट रकमों में से बंधक धन या अन्य शोध्य रकमों के पूर्णत :या भागत :संदाय के लिए अपने अधिकारों और हितों के अनुसार दावा करने का हकदार होगा, किन्तु ऐसा कोई बन्धक ,भार ,धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है ।
- (5)यदि ऐसे उपक्रम के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, नियत दिन से पूर्व किसी समय अनुदत्त कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत जो उस दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त है, तो ऐसे उपक्रम के संबंध में और उसके प्रयोजनों के लिए, ऐसे दिन को और उसके पश्चात् अपने प्रकट शब्दानुसार प्रवृत्त बनी रहेगी और ऐसे उपक्रम के धारा 7 के अधीन किसी सरकारी कम्पनी में निहित होने की तारीख से ही, उस सरकारी कम्पनी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गई है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत ऐसी सरकारी कम्पनी को अनुदत्त की गई थी और ऐसी सरकारी कम्पनी उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगी जिसके लिए वह कम्पनी उसे उसके निबन्धनों के अनुसार धारण करती ।
- (6)यदि नियत दिन को, किसी संपत्ति के संबंध में जो धारा 3 या धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, कम्पनी द्वारा संस्थित या उसके विरुद्ध लाया गया कोई वाद ,अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लम्बित है तो कम्पनी के उपक्रमों के अन्तरण या इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के कारण उसका उपशमन नहीं होगा ,वह बन्द नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ,किन्तु वह वाद ,अपील या अन्य कार्यवाही केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध, या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 7 के अधीन किसी सरकारी कम्पनी में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं वहां उस सरकारी कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी ,चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी ।