Of right of private defenceCentral
Section 35 of The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 in hindi
(क) मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ; (ख) किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाषा में आने वाला अपराध है, या जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार करने का प्रयत्न है, अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपति, चाहे चल हो या अचल, उसकी प्रतिरक्षा करे ।
34PreviousSection 34 प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विषय में36NextSection 36 धारा - 36. ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकृतचित, आदि हो - जब कोई कार्य, जो अन्यथा कोई अपराध होता, उस कार्य को करने वाले व्यक्ति के बालकपन, समझ की परिपक्वता के अभाव, चित विकृति या मत्तता के कारण, या उस व्यक्ति के किसी भ्रम के कारण, अपराध नहीं है, तब प्रत्येक व्यक्ति उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह उस कार्य के वैसा अपराध होने की दशा में रखता ।