Section 7 of The Admiralty (Jurisdiction and Settlement of Maritime Claims) Act, 2017 in hindi — कतिपय मामलों में व्यक्तिबंदी कार्रवाइयों पर निर्बन्धन
Bare section text
Official Legislative Text
- (1)जहां निम्नलिखित में से उद्भूत कोई नुकसानी या जीवन हानि या वैयक्तिक नुकसानी की बाबत उद्भूत कोई समुद्री दावा-
- (1)जलयानों के बीच टक्कर से; (#) एक या अधिक जलयानों की दशा में रक्षा चालें चलने का पालन करने या पालन नहीं करने से; (ए) एक या अधिक जलयानों के भाग पर टक्कर के संबंध में वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 958 (958 का 44) की धारा 285 के अनुसरण में बनाए गए टक्कर विनियमों के अननुपालन से, उच्च न्यायालय किसी प्रतिवादी के विरुद्ध इस धारा के अधीन कार्यवाही को तब तक ग्रहण नहीं करेगा, जब तक कि-- (क) वाद हेतुक पूर्णत: या भागत: भारत में उद्भूत न हुआ हो; या (ख) ऐसा प्रतिवादी, उच्च न्यायालय द्वारा कार्यवाही के प्रारंभ के समय, भारत में वास्तविक रूप से और स्वेच्छया निवास नहीं करता है या कारबार नहीं करता है या अभिलाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्य नहीं करता है: परंतु यह कि किसी ऐसे मामले में जहां एक से अधिक प्रतिवादी हैं और जहां उन प्रतिवादियों में से एक प्रतिवादी जो भारत में वास्तविक रूप से या स्वेच्छया निवास या कारबार या लाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से कारबार नहीं करता है, ऐसी कार्रवाई के लिए न्यायालय की अनुमति से या ऐसी कार्रवाई में प्रत्येक प्रतिवादी की मौन स्वीकृति से मामले में कार्रवाई पर विचार किया जा सकेगा ।
- (2)उच्च न्यायालय किसी ऐसे दावे को प्रवृत्त करने के लिए किसी व्यक्तिबंदी कार्रवाई पर विचार नहीं करेगा जिसको यह धारा लायू होती है जब तक कि भारत के बाहर उसी प्रतिवादी के विरुद्ध किसी न्यायालय में उसी प्रसंगति या प्रसंगतियों की श्रृंखला के बारे में वादी द्वारा पहले लाई गई कोई कार्यवाही बंद कर दी गई है या अन्यथा समाप्त हो गई है ।
- (3)उपधारा (2) के उपबंध प्रतिदावों को उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे उसी प्रसंगति या प्रसंगतियों की श्रृंखला से उद्भूत कार्यवाहियों में प्रतिदावों के सिवाय कार्रवाइयों को लागू होंगे ।
- (4)उपधारा (3) के प्रयोजन के लिए वादी और प्रतिवादी के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह क्रमश: प्रतिदावे में 'वादी और प्रतिदावे में प्रतिवादी के प्रति निर्देश है ।
- (5)उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध किसी कार्रवाई या प्रतिदावे को लागू नहीं होंगे यदि प्रतिवादी उच्च न्यायालय की अधिकारिता को निवेदन करता है या निवेदन करने के लिए सहमत है ।
- (6)उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन उच्च न्यायालय को किसी ऐसे दावे को प्रवृत्त करने के लिए किसी व्यक्तिबन्दी कार्रवाई को ग्रहण करने की अधिकारिता होगी जिसको इस धारा के उपबंध लागू होते हैं जब कभी उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) में विनिर्दिष्ट शर्तों में से कोई भी शर्त पूरी होती है और अधिकारिता के बाहर आदेशिका के तामील संबंधी तत्समय प्रवृत्त कोई विधि लागू होगी ।