Section 4 of The Admiralty (Jurisdiction and Settlement of Maritime Claims) Act, 2017 in hindi — समुद्री दावा
Bare section text
Official Legislative Text
- (1)उच्च न्यायालय निम्नलिखित के कारण किसी जलयान के विरुद्ध उत्पन्न होने वाले किसी समुद्री दावे के संबंध में किसी प्रश्न की सुनवाई और उसके अवधारण की अधिकारिता का प्रयोग कर सकेगा-- (क) किसी जलयान के कब्जे या स्वामित्व या उसमें किसी शेयर के स्वामित्व के बारे में कोई विवाद; (ख) किसी जलयान के सह-स्वामियों के बीच जलयान के नियोजन या उपार्जन के विषय में कोई विवाद; (ग) किसी जलयान के संबंध में उसी प्रकृति के किसी बंधक या प्रभार; (घर) किसी जलयान के प्रचालन से कारित हानि या नुकसानी; (ड) किसी जलयान के प्रचालन के प्रत्यक्ष संबंध में जीवन हानि या व्यक्तिगत क्षति, चाहे वह भूमि पर या जल में हुई हो; (च) किसी माल को या उसके संबंध में हानि या नुकसानी; (छ) किसी जलयान के फलक पर माल या यात्रियों के वहन से संबंधित करार, चाहे वे भाड़े पर पोत लेने की संविदा में अंतर्विष्ट हो या अन्यथा; (ज) जलयान का उपयोग करने या भाड़े पर लेने के संबंध में कोई करार, चाहे वह भाड़े पर पोत लेने की संविदा में अंतर्विष्ट हो या अन्यथा; (झ) उद्घारण सेवा जिसके अंतर्गत, किसी जलयान की बाबत उद्धारण सेवा संबंधी विशेष प्रतिकर जो स्वयं द्वारा या. उसके स्थोरा से पर्यावरण की नुकसान की आशंका है, भी है, यदि लागू हो; (अ) अनुकर्षण: (ट) यान मार्गदर्शन; (ठ) ऐसे यान को, उसके प्रचालन, प्रबंध, परिरक्षण या रखरखाव जिसके अंतर्गत संदेय या उद्ग्रहणीय फीस भी है, के लिए प्रदाय की गई सामग्री, विनश्वर या अनश्वर भंडार, बंकर ईंधन, उपस्कर (जिसके अंतर्गत आधान भी है) या दी गई सेवाएं; (ड) जलयान का सन्निर्माण, पुनर्नि्माण, मरम्मत, संपरिवर्तन सज्जित करने; (ढ) किसी पत्तन, बंदरगाह, नहर, डॉक या प्रकाशमार्ग पथकर, अन्य पथकर, जलमार्ग या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसी प्रकार के प्रभार्य कोई प्रभार के संबंध में शोध्य: (ण) मजदूरी या मजदूरी में से कोई शोध्य राशि या अधिनिर्णीत किया जाने वाला शोध्य जो उनकी ओर से संदेय मजदूरी या प्रत्यावर्तन की लागत या सामाजिक बीमा अंशदान के रूप में वसूलनीय हो या किसी ऐसी रकम जिसे एक कर्मचारी के रूप में किसी व्यक्ति को संदाय करने की किसी नियोजक की बाध्यता है, चाहे ऐसी बाध्यता तत्समय प्रवृत्त नियोजन की संविदा के कारण या विधि के प्रवर्तन द्वारा (जिसके अंतर्गत किसी देश की विधि का प्रवर्तन भी है) उत्पन्न बाध्यता हो या नहीं और इसके अंतर्गत वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 958 (958 का 44) की धारा 50 और धारा ।5। के उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी जलयान से संबंधित प्रबंधन और चालक कर्मीदल करार के अधीन उत्पन्न होने वाला कोई दावा भी है, के लिए जलयान के मास्टर या कर्मीदल के सदस्य या उसके वारिसों तथा उसके आश्रितों द्वारा किया गया दावा; (त) जलयान या उसके स्वामियों की ओर से उपगत संवितरण; (थ) विशिष्ट औसत या साधारण औसत; (द) जलयान के विक्रय के लिए किसी संविदा से उद्भूत विवाद; (ध) जलयान की बाबत बीमा प्रीमियम (जिसके अंतर्गत पारस्परिक बीमा मांगे भी हैं जो जलयान के स्वामियों या पट्टांतरण चार्टररों द्वारा या उनकी ओर से संदेय हों; (न) जलयान के स्वामी या पट्टांतरण चार्टरर द्वारा या उनकी ओर से जलयान की बाबत संदेय कोई कमीशन, दलाली या अभिकरण फीस; (प) पर्यावरण, तटरेखा या संबद्ध हितों को जलयान द्वारा कारित नुकसानी या नुकसानी की आशंका; ऐसी नुकसानी को रोकने, न्यूनतम रखने या हटाने के लिए किए गए उपाय; ऐसी नुकसानी के लिए प्रतिकर; वास्तविक रूप से किए गए या किए जाने वाले पर्यावरण के पुनःस्थापन के लिए युक्तियुक्त उपायों की लागत; ऐसी नुकसानी के संबंध में तृतीय पक्षकारों द्वारा उपगत या उपगत होने के लिए संभाव्य हानि; या ऐसी कोई अन्य नुकसानी, लागत या वैसी ही प्रकृति की हानि जो इस खंड में परिलक्षित है; (फ) ऐसे जलयान को उठाने, हटाने, प्रत्युद्घृत करने, नष्ट करने या अहानिकर बनाने, जो डूब गया है, विध्वंसित, उत्कूलित या परित्यक्त हो गया है जिसके अंतर्गत ऐसी कोई चीज भी है जो ऐसे जलयान के फलक पर है या रही है, से संबंधित लागत या व्यय और परित्यक्त जलयान के परिरक्षण और उसके कर्मीदल के रखरखाव से संबंधित लागतें या व्यय; और (ब) समुद्रीय धारणाधिकार । स्पष्टीकरण--खंड (थ) के प्रयोजनों के लिए “विशिष्ट औसत” और “साधारण औसत” पदों का वही अर्थ होगा जो समुद्री बीमा अधिनियम, 963 (963 का ) की धारा 64 की उपधारा (1) और धारा 66 की उपधारा (2) में क्रमश: उनके हैं ।
- (2)उपधारा (1) के अधीन अधिकारिता का प्रयोग करते समय उच्च न्यायालय जलयान के संबंध में पक्षकारों के बीच परादेय तथा अपरिनिर्धारित किसी हिसाब को तय कर सकेगा और यह निदेश दे सकेगा कि जलयान या उसका कोई हिस्सा विक्रय कर दिया जाएगा या ऐसा अन्य आदेश करेगा जो वह ठीक समझे ।
- (3)जहां उच्च न्यायालय किसी जलयान के विक्रय किए जाने का आदेश देता है, वहां विक्रय के आगमों के हक के बारे में उत्पन्न होने वाले प्रश्न को सुन सकेगा और उसका अवधारण कर सकेगा ।
- (4)इस अधिनियम के अधीन किसी जलयान को बंदी बनाए जाने के लिए किए गए आदेश या विक्रय के लिए किसी जलयान का कोई आगम, नावधिकरण कार्यवाही के अंतिम परिणाम आने तक किसी दावे के संबंध में प्रतिभूति के रूप में रखा जाएगा ।