Central
Section 5C of The Suppression of Unlawful Acts against Safety of Civil Aviation Act, 1982 in hindi
अभिहित न्यायालय द्वारा विचारणीय अपराध
- (1)दंड प्रक्रिया संहिता, 973 (974 का 2) में किसी बात के होते नि भी-- (क) इस अधिनियम के अधीन सभी अपराध धारा 5ख की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अभिहित न्यायालय द्वारा ही विचारणीय होंगे ; (ख) जहां ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है या जिसके द्वारा अपराध के किए जाने का संदेह है, दंड प्रक्रिया संहिता, 973 (974 का 2) की धारा 67 की उपधारा (2) या उपधारा (2क) के अधीन किसी मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है वहां ऐसा मजिस्ट्रेट, ऐसे व्यक्ति का ऐसी अभिरक्षा में निरोध, जैसा वह ठीक समझे, कुल मिलाकर पन्द्रह दिन से अनधिक अवधि के लिए, जहां ऐसा मजिस्ट्रेट न्यायिक मजिस्ट्रेट है और कुल मिलाकर सात दिन से अनधिक अवधि के लिए जहां ऐसा मजिस्ट्रेट कार्थयपालक मजिस्ट्रेट है, प्राधिकृत कर सकेगा : परन्तु जहां ऐसा मजिस्ट्रेट यह समझता है कि--
- (1)जब ऐसा व्यक्ति उसके पास पूर्वोक्त रूप से भेजा जाता है ; या
- (7)उसके द्वारा प्राधिकृत निरोध की अवधि की समाप्ति पर या उससे पूर्व किसी समय, ऐसे व्यक्ति का निरोध अनावश्यक है वहां वह ऐसे व्यक्ति को अभिहित न्यायालय के पास भेजने का आदेश कर सकेगा ; (ग) अभिहित न्यायालय, खंड (ख) के अधीन उसके पास भेजे गए व्यक्ति के संबंध में उसी शक्ति का प्रयोग कर सकेगा जो वह मजिस्ट्रेट, जिसे मामले के विचारण की अधिकारिता है, ऐसे मामले में दंड प्रक्रिया संहिता, ।973 (974 का 2) की धारा 67 के अधीन किसी ऐसे अभियुक्त व्यक्ति के संबंध में, जो उसके पास उस धारा के अधीन भेजा गया हो, प्रयोग करता ; (घ) अभिहित न्यायालय, इस निमित्त प्राधिकृत, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा किए गए किसी परिवाद के परिशीलन पर उस अपराध का संज्ञान अभियुक्त को विचारण के लिए सुपुर्द किए बिना कर सकेगा ।
- (2)इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करते समय अभिहित न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से भिन्न किसी अपराध का भी जिससे अभियुक्त उसी विचारण में दंड प्रक्रिया संहिता, 973 (974 का 2) के अधीन आरोपित किया जा सकता है, विचारण सकेगा ।