State · Sikkim
Section 20 of The State Bank of Sikkim (Acquisition of Shares) and Miscellaneous Provisions Act, 1982 in hindi
सिक्किम बैंक के विद्यमान अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा का सहकारी बैंक को अंतरण
- (1)सिक्किम बैंक का प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी (उसके प्रबन्ध निदेशक को छोड़कर) जो नियत दिन के ठीक पूर्व सिक्किम बैंक के नियोजन में है,-- (क) नियत दिन से ही राज्य सरकार का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा, और (ख) जहां सिक्किम बैंक के उपक्रम धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन सहकारी बैंक में निहित होने के लिए निदेशित हैं वहां ऐसे निहित होने की तारीख से ही उस सहकारी बैंक का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा, और, यथास्थिति, राज्य सरकार या सहकारी बैंक के अधीन पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या सेवा धारण करेगा जो उसे तब अनुज्ेय होते जब ऐसा निधान नहीं हुआ होता और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक, यथास्थिति, राज्य सरकार या सहकारी बैंक के अधीन उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें, यथास्थिति, राज्य सरकार द्वारा या सहकारी बैंक द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं ।
- (2)ऐसा कोई व्यक्ति जो नियत दिन को सिक्किम बैंक अथवा किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि या ऐसी निधि को प्रशासित करने वाला किसी प्राधिकारी से कोई पेंशन या अन्य अधिवार्षिकी या अनुकम्पा भत्ता या प्रसुविधा प्राप्त करने का हकदार है या प्राप्त कर रहा है, सहकारी बैंक या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि या ऐसी निधि को प्रशासित करने वाले किसी प्राधिकारी द्वारा वही पेंशन, भत्ता या प्रसुविधा संदत्त की जाने का और उससे प्राप्त करने का तब तक हकदार होगा जब तक वह उन शर्तों का पालन करता है जिन पर पेंशन, भत्ता या प्रसुविधा दी गई थी और यदि इस बारे में यह प्रश्न पैदा होता है कि कया उसने ऐसी शर्तों का पालन किया है तो उस प्रश्न का अवधारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ।
- (3)उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति की ।6 नवम्बर, ।976 के पश्चात् और नियत दिन के पूर्व की गई किसी नियुक्ति या उसको दी गई प्रोन्नति, वेतन-वृद्धि या पेंशन भत्ते या अन्य प्रसुविधा जो सामान्यत: नहीं दी गई होती या जो सिक्किम बैंक या किसी भविष्य निधि या 6 नवम्बर, 976 के पूर्व प्रवृत्त किसी अन्य निधि के नियमों या प्राधिकारों के अधीन अनुज्ञेय नहीं हुई होती, प्रभावी या संदेय नहीं होगी या किसी सहकारी बैंक से या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि से या उस निधि को प्रशासित करने वाले किसी प्राधिकारी से उनका दावा नहीं किया जा सकेगा, जब तक कि राज्य सरकार ने, यथास्थिति, साधारण या विशेष आदेश द्वारा उस नियुक्ति, प्रोन्नति या वेतन वृद्धि की पुष्टि न कर दी हो अथवा ऐसे पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के निरन्तर दिए जाने का निदेश न दे दिया हो ।
- (4)औद्योगिक विवाद अधिनियम, 947 (947 का 4) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, सिक्किम बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का, राज्य सरकार या सहकारी बैंक को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को उस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
- (5)ऐसे व्यक्ति के बारे में जो नियत दिन के ठीक पूर्व सिक्किम बैंक के प्रबन्ध निदेशक का पद धारण कर रहा है, यह समझा जाएगा कि उसने नियत दिन को अपना पद रिक्त कर दिया है और इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी करार या संविदा में किसी बात के होते हुए भी, वह सिक्किम बैंक, राज्य सरकार या सहकारी बैंक से पदहानि के लिए या उसके नियोजन से सम्बन्धित किसी करार या संविदा के समय पूर्व परिसमापन के लिए किसी रकम का ऐसी पेंशन, रकम या अन्य प्रसुविधा के सिवाय हकदार नहीं होगा जो सहकारी बैंक उसे उस रकम का ध्यान रखते हुए मंजूर करे जो वह व्यक्ति सिक्किम बैंक के अधिकारी के रूप में तब प्राप्त करता, यदि यह अधिनियम पारित न हुआ होता और यदि वह अपने नियेजन से मामूली अनुक्रम में निवृत्त हुआ होता ।
- (6)जहां सिक्किम बैंक के प्रबन्ध निदेशक को, 6 नवम्बर, 976 के बाद और नियत दिन के पूर्व, प्रतिकर या उपदान के रूप में कोई धनराशि संदत्त की गई है वहां सहकारी बैंक इस प्रकार संदत्त किसी धनराशि के प्रतिदाय का दावा करने का हकदार होगा यदि उस सदांय की, राज्य सरकार द्वारा, किसी साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुष्टि नहीं की जाती है । अध्याय 7 प्रकीर्ण 2. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव--इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी की किसी डिक्री या आदेश में, उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे । 3. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण--(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए केन्द्रीय सरकार, या उस सरकार के किसी अधिकारी, या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के किसी अधिकारी अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही न होगी ।
- (2)इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए, कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्रवाई, केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी । 4. शास्तियां--जो कोई व्यक्ति,-- (क) सिक्किम बैंक के उपक्रमों की भागरूप किसी सम्पत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक से सदोष विधारित करेगा; या (ख) सिक्किम बैंक के किसी उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा या ऐसे उपक्रम से संबंधित किसी ऐसे दस्तावेज को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, जानबूझकर विधारित करेगा अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या उस सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा अथवा सिक्किम बैंक के उपकमों से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा-बहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हैं, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा; या (ग) सिक्किम बैंक के किसी उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन कोई ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है, वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा । 5. कंपनी द्वारा अपराध--(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया जाता है, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे : परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
- (2)उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी, उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा । स्पष्टीकरण--इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-- (क) “कम्पनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा (ख) फर्म के संबंध में, “निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है । 6. शक्तियों का प्रत्यायोजन--(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य और धारा ।7 और धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों से भिन्न सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिप्ट किए जाएं ।
- (2)जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया जाता है तब वह व्यक्ति जिसे ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की गई है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा । 7. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति--(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
- (2)इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगा । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 8. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति--यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से अंसगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी : परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा । 9. अन्य विधियों में सिक्किम बैंक के प्रति निर्देश--नियम दिन से ही (इस अधिनियम या सिक्किम राज्य बैंक उद्घोषणा, 968 से भिन्न), किसी विधि में या किसी संविदा या अन्य लिखत में सिक्किम बैंक के प्रति किसी निर्देश को, केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी साधारण या विशेष आदेश में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, सहकारी बैंक के प्रति निर्देश समझा जाएगा । 20. सिक्किम बैंक का विघटन--धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी की जाने की तारीख को, सिक्किम बैंक विघटित हो जाएगा और सिक्किम राज्य बैंक उद्घोषणा, 968 निरसित हो जाएगी, और साधारण खण्ड अधिनियम, 897 (897 का 0) की धारा 6 के उपबंध ऐसे निरसन को उसी प्रकार लायू होंगे मानो उक्त उद्घोषणा केन्द्रीय अधिनियम थी । | अनुसूची [धारा 8 (1) देखिए] सिक्किम स्टेट बैंक के शेयरों के केन्द्रीय सरकार को अंतरण के लिए रकम के संदाय की रीति 1. इस अनुसूची में “शेयरधारक” से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पूर्व, सिक्किम बैंक में, सिक्किम राज्य सरकार से भिन्न किसी शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्री कृत है । 2. सिक्किम बैंक की शेयर पूंजी में के प्रत्येक शेयर के लिए, जो इस अधिनियम के कारण केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो गई है, केन्द्रीय सरकार उसके प्रत्येक शेयरधारक को इस अनुसूची के पैरा 3 में विनिर्दिष्ट रीति से, पचपन रुपए प्रति शेयर की दर से संगणित रकम देगी । 3. प्रत्येक व्यक्ति को जो नियत दिन को सिक्किम बैंक में शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत है और जिसके शेयर इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अर्जित कर लिए गए हैं, उसके द्वारा इस प्रकार धारित ऐसे प्रत्येक शेयर के लिए, पैरा 2 में विनिर्दिष्ट दर से संगणित रकम का, भारतीय रिजर्व बैंक के नाम दिए गए चैक द्वारा संदाय किया जाएगा ।