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Section 30 of The Code of Criminal Procedure, 1973 in hindi
परन्तु वह अवधि -- (क) धारा 29 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्ति से अधिक नहीं होगी (ख) जहाँ कारावास मुख्य दण्डादेश के भाग के रूप में अधिनिर्णीत किया गया है, वहाँ वह उस कारावास की अवधि के चौथाई से अधिक न होगी जिसको मजिस्ट्रेट,उस अपराध के लिए, न कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर दण्ड के तौर पर, देने के लिए सक्षम है।
- (2)इस धारा के अधीन अधिनिर्णीत कारावास उस मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 29 के अधीन अधिनिर्णीत की जा सकने वाली अधिकतम अवधि के कारावास के मुख्य दण्डादेश के अतिरिक्त हो सकता है।
29PreviousSection 29 दण्डादेश, जो मजिस्ट्रेट दे सकेंगे -- (1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय मृत्यु या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास के दण्डादेश के सिवाय कोई ऐसा दण्डादेश दे सकता है जो विधि द्वारा प्राधिकृत है।31NextSection 31 एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्ध होने के मामलों में दण्डादेश -- (1) जब एक विचारण में कोई व्यक्ति दो या अधिक अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया जाता है तब, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 71 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, न्यायालय उसे उन अपराधों के लिए विहित विभिन्न दण्डों में से उन दण्डों के लिए, जिन्हें देने के लिए ऐसा न्यायालय सक्षम है, दण्डादेश दे सकता है; जब ऐसे दण्ड कारावास के रूप में हों तब, यदि न्यायालय ने यह निर्देश न दिया हो कि ऐसे दण्ड साथ-साथ भोगे जाएँगे, तो वे ऐसे क्रम से एक के बाद एक प्रारम्भ होंगे, जिसका न्यायालय निर्देश दे ।