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Section 20 of The Jute Companies (Nationalisation) Act, 1980 in hindi
- (1)दूसरी अनुसूची में उपवर्णित पूर्विकताओं के प्रति निर्देश से किसी जूट कंपनी के विरुद्ध दावों की परीक्षा करने के पश्चात्, आयुक्त ऐसी कोई तारीख नियत करेगा जिसको या जिससे पूर्व प्रत्येक दावेदार कंपनी के विरुद्ध अपने दावे का सबूत फाइल करेगा ।
- (2)इस प्रकार नियत तारीख के बारे में कम से कम 4 दिन की सूचना अंग्रेजी भाषा के ऐसे दैनिक समाचार पत्र के एक अंक में जो देश के अधिकांश भाग में पढ़ा जाता है और ऐसी प्रादेशिक भाषा के दैनिक समाचार पत्र के एक अंक में, जो आयुक्त उपयुक्त समझे, विज्ञापन द्वारा दी जाएगी, और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत आयुक्त के समक्ष ऐसे विज्ञापन में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर फाइल करे ।
- (3)ऐसे प्रत्येक दावेदार को, जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि के अन्दर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहेगा, आयुक्त द्वारा किए गए संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
- (4)आयुक्त, ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात् जो उसकी राय में आवश्यक है और संबंधित जूट कंपनी को दावे का खण्डन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदार को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात्, लिखित आदेश द्वारा, दावे को पूर्णतः या भागत: स्वीकार या अस्वीकार करेगा ।
- (5)आयुक्त को अपने कृत्यों के निर्वहन से उत्पन्न होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं, जहां वह अपनी वैठकें कर सकेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए उसे निम्नलिखित विषयों की बाबत वहीं शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 908 (908 का 5) के अधीन वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात् :-- (क) किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा कराना; (ख) किसी दस्तावेज या अन्य भौतिक पदार्थ का, जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य है, प्रकटीकरण या पेश किया जाना; (ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
- (6)आयुक्त के समक्ष अन्वेषण भारतीय दण्ड संहिता (860 का 45) की धारा 93 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 973 (974 का 2) की धारा ।95 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
- (7)कोई दावेदार जो आयुक्त के विनिश्चय से असंतुष्ट है, ऐसे विनिश्चय के विरुद्ध अपील उस उच्च न्यायालय में कर सकेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर संबंधित जूट कंपनी का रजिस्ट्री कृत कार्यालय स्थित है : परन्तु जहां किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है, वहां ऐसी अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी ।