Section 6 of The Industrial Disputes (Banking and Insurance Companies) Act, 1949 in hindi — जिन विवादों के बारे में अधिनिर्णय या विनिश्चय किए जा चुके हैं उन्हें पुनर्न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तियां
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Official Legislative Text
- (1)जहां कि किसी बैंककारी या बीमा कम्पनी से सम्पृक्त किसी औद्योगिक विवाद के बारे में किसी राज्य सरकार द्वारा या ऐसी सरकार के अधीनस्थ किसी आफिसर या प्राधिकारी द्वारा गठित या नियुक्त किसी अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई अधिनिर्णय या विनिश्चय किया जा चुका है, वहां केन्द्रीय सरकार, इस बात के होते हुए भी कि उक्त अधिनिर्णय या विनिश्चय प्रवृत्त है, उस विवाद को या विवादग्रस्त मामलों में से किसी को उक्त अधिनियम के अधीन गठित औद्योगिक अधिकरण को पुनर्न्यायनिर्णयन के लिए लिखित आदेश द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 10 के अधीन निर्देशित कर सकेगी और इस प्रकार किए गए अधिनिर्णय या विनिश्चय के या ऐसे अधिनिर्णय या विनिश्चय के किसी भाग के कार्यान्वयन को तब तक के लिए, जब तक कि वह औद्योगिक अधिकरण, जिसे वह विवाद या विवादग्रस्त मामलों में से कोई पुनर्न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित किया गया है, अपना अधिनिर्णय निवेदित न कर दे या ऐसी अतिरिक्त कालावधि के लिए, जैसी केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे, रोक सकेगी।
- (2)उस औद्योगिक अधिकरण द्वारा, जिसे वह विवाद या विवादग्रस्त मामलों में से कोई पुनर्न्यायनिर्णयन के लिए इस प्रकार निर्देशित किया गया है, अपना अधिनिर्णय, उक्त अधिनियम की धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन निवेदित कर दिए जाने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा यह घोषित कर सकेगी कि उस विवाद के बारे में राज्य सरकार द्वारा या ऐसी सरकार के अधीनस्थ किसी आफिसर या प्राधिकारी द्वारा गठित या नियुक्त अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा पहले किया गया अधिनिर्णय या विनिश्चय अथवा उस अधिनिर्णय या विनिश्चय का वह भाग जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रवृत्त नहीं रह जाएगा।