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Section 25 of The Maritime Zones of India (Regulation of Fishing by Foreign Vessels) Act, 1981 in hindi
- (1)केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
- (2)विशिष्टितया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात् :-- (क) वह प्ररूप जिसमें किसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञापत्र के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वह फीस जो ऐसे आवेदन के साथ संलग्न होगी ; (ख) वे विषय जिन पर अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापत्र की मंजूरी के समय विचार किया जाएगा ; (ग) अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापन्र का प्ररूप और वे शर्तें और निर्बन्धन जिनके अधीन ऐसी अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापन्र मंजूर किए जा सकेंगे ; (घ) वह रीति जिसमें विदेशी जलयान का मत्स्यन संभार धारा 7 के अधीन भरा रखा जाएगा ; (ड) वे निबन्धन और शर्तें जिनके अधीन किसी विदेशी जलयान को कोई वैज्ञानिक अनुसंधान या अन्वपेण करने के प्रयोजन के लिए या धारा 8 के अधीन प्रायोगिक आधार पर मत्स्यन के लिए किसी भारतीय सामुद्रिक क्षेत्र के भीतर मत्स्यन के लिए उपयोग किए जाने की अनुज्ञा दी जा सकेगी ; (च) वह प्ररूप जिसमें धारा 9 की उपधारा (4) के खण्ड (क) के प्रथम परन्तुक के अधीन अभिगृहीत जलयान या अन्य चीजों के निर्मोचन के लिए आवेदन किया जा सकेगा; (छ) कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।
- (3)इस धारा के अधीन कोई नियम बनाने में केन्द्रीय सरकार यह उपबन्ध कर सकेगी कि उसका उल्लंघन जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
- (4)इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात्, वह नियम ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निप्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।