Section 2 of The Maritime Zones of India (Regulation of Fishing by Foreign Vessels) Act, 1981 in hindi
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) “भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र” से राज्यक्षेत्रीय सागरखंड, महाद्वी पीय मग्नतटभूमि, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामुद्रिक क्षेत्र अधिनियम, 976 (976 का 80) की धारा 7 के उपबंधों के अनुसार भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र अभिप्रेत है ;
(ख) “मत्स्य” से कोई जलीय जीवजन्तु अभिप्रेत है चाहे वह सरोवर पाटप समुदाय का हो अथवा नहीं और इसके अन्तर्गत जलीय कवच प्राणी, क्रस्टेशियाई, मोलस्क, कूर्म (चेनोनिया) जलीय स्तनधारी, (उसके युवशील, पोना अंडे और जलांडक) होल्थूरियन्स, सीलन्टरेटूस, समुद्री घास-पात, प्रवाल (पोरीफेरा) और कोई अन्य जलीय जीव हैं ;
(ग) “मत्स्यन” से किसी भी ढंग से मछली को फंसाना, बाना, उसको मार डालना, आकर्षित करना या उसका पीछा करना अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत मछली का प्रसंस्करण, परिरक्षण, अंतरण, प्राप्त करना तथा परिवहन है :
(घ) “विदेशी जलयान” से भारतीय जलयान से भिन्न कोई जलयान अभिप्रेत है ;
(ड) “भारतीय जलयान” से अभिप्रेत है--
([) वह जलयान जो सरकार या किसी केन्द्रीय अधिनियम या प्रांतीय या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम के स्वामित्वाधीन है, या
- (1)वह जलयान--
- (1)जो पूर्णत: ऐसे व्यक्तियों के स्वामित्वाधीन है जिनमें से प्रत्येक को निम्नलिखित वर्णनों में से कोई लागू होता है :--
- (1)भारत का नागरिक,
- (2)ऐसी कम्पनी जिसमें कम से कम साठ प्रतिशत शेयर पूंजी भारत के नागरिकों द्वारा धारित है,
- (3)कोई ऐसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी जिसका प्रत्येक सदस्य भारत का नागरिक है या जहां कोई अन्य सहकारी सोसाइटी उसकी सदस्य हो वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो ऐसी अन्य सहकारी सोसाइटी का सदस्य है, भारत का नागरिक है; और
- (7)जो वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 958 (958 का 44) के अधीन या किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम या प्रांतीय या राज्य अधिनियम के अधीन रजिस्ट्री कृत है । स्पष्टीकरण--इस खंड के प्रयोजनों के लिए “रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी” से ऐसी सोसाइटी अभिप्रेत है जो सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 92 (92 का 2) या किसी राज्य में उस समय प्रवृत्त सहकारी सोसाइटी से संबंधित किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्री कृत है या रजिस्ट्री कृत हुई समझी जाती है : (च) “अनुज्ञप्ति” से धारा 4 के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है ; (छ) “भारत का सामुद्रिक क्षेत्र” से भारत का राज्यक्षेत्रीय सागर खंड या भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र अभिप्रेत है ; (ज) “मास्टर” से किसी जलयान के संबंध में ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके समादेशन या भारसाधन में उस समय जलयान है: (झ) “स्वामी” के अन्तर्गत किसी जलयान के संबंध में व्यक्तियों का कोई संगम, चाहे वह निगमित हो या नहीं जिसके स्वामित्व के अधीन जलयान है या जिसके द्वारा उसे चार्टर किया गया है, अभिप्रेत है ; (अं) “अनुज्ञापत्र” से धारा 5 के अधीन मंजूर किया गया या मंजूर किया गया समझा गया अनुज्ञापत्र अभिप्रेत है ; (ट) “विहित से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ; (ठ) “प्रसंस्करण” के अन्तर्गत मत्स्यन के संबंध में मछली को साफ करना, उसका सिर काटना, पतले टुकड़े करना, छिलका उतारना, स्वक्षण करना, बर्फ में रखना, प्रशीतन करना, डिब्बा बन्दी करना, लवणीय करना, धूमन करना, पकाना, अचार डालना, सुखाना और अन्यथा किसी ढंग से तैयार या परिरक्षण करना है ; (ड) “विनिर्दिष्ट पत्तन” से ऐसे पत्तन अभिप्रेत हैं जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट करे ; (ढ) “भारत के राज्यक्षेत्रीय सागरखण्ड” से राज्यक्षेत्रीय सागर खण्ड, महाद्वीपीय मग्नतटभूमि, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामुद्रिक क्षेत्र अधिनियम, 976 (976 का 80) की धारा 3 के उपबंधों के अनुसार भारत का राज्यक्षेत्रीय सागर खण्ड अभिप्रेत है ; (ण) “जलयान” के अन्तर्गत कोई पोत, नौका, चलत जलयान या किसी अन्य प्रकार का कोई जलयान है । अध्याय 2 विदेशी जलयानों द्वारा मत्स्यन का विनियमन