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Section 5 of The Departmental Inquiries (Enforcement of Attendance of Witnesses and Production of Documents) Act, 1972 in hindi
साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेज पेश कराने की प्राधिकृत जांच प्राधिकारी की शक्ति
- (1)धारा 4 के अधीन प्राधिकृत प्रत्येक जांच प्राधिकारी को (जिसे इसमें इसके पश्चात् “प्राधिकृत जांच प्राधिकारी” कहा गया है) निम्नलिखित विषयों के बारे में, अर्थात् :— (क) किसी साक्षी को समन करने और हाजिर कराने तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करने; (ख) किसी दस्तावेज या ऐसी अन्य सामग्री के जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य है, प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करने; (ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करने, के बारे में वे ही शक्तियां होंगी जो सिविल न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन, किसी वाद का विचारण करते समय होती हैं।
- (2)उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, प्राधिकृत जांच प्राधिकारी भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 2 के खण्ड (ट) में यथापरिभाषित किसी समनुषंगी बैंक अथवा बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन तथा अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) के अधीन गठित किसी तत्स्थानी नए बैंक को इस बात के लिए विवश नहीं करेगा कि वह,— (क) किन्हीं ऐसी लेखा पुस्तकों या अन्य दस्तावेजों को पेश करे जिसके बारे में भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, समनुषंगी बैंक या तत्स्थानी नया बैंक गोपनीय प्रकृति का होने का दावा करता है; अथवा (ख) ऐसे किन्हीं पुस्तकों या दस्तावेजों को विभागीय जांच की कार्यवाही के अभिलेख का भाग बनाए; अथवा (ग) ऐसी किन्हीं पुस्तकों या दस्तावेजों का, यदि उन्हें पेश किया जाए तो, निरीक्षण, अपने समक्ष के किसी पक्षकार को अथवा किसी अन्य व्यक्ति को करने दे।
- (3)किसी साक्षी की हाजिरी के लिए या किसी दस्तावेज के पेश किए जाने के लिए प्राधिकृत जांच प्राधिकारी द्वारा निकाली गई प्रत्येक आदेशिका उस जिला न्यायाधीश के माध्यम से तामील और निष्पादित की जाएगी जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर साक्षी अथवा अन्य व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेशिका तामील या निष्पादित की जानी है, स्वेच्छया निवास करता है या करबार करता है या अभिलाभ के लिए स्वयं काम करता है, और ऐसी किसी आदेशिका की अवज्ञा के लिए कोई कार्रवाई करने के प्रयोजनार्थ, ऐसी प्रत्येक आदेशिका जिला न्यायाधीश द्वारा निकाली गई आदेशिका समझी जाएगी।
- (4)इस अधिनियम के अधीन कोई विभागीय जांच करने वाला प्रत्येक प्राधिकृत जांच प्राधिकारी दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 480 और 482 के प्रयोजनार्थ सिविल न्यायालय समझा जाएगा।