Section 2 of The Uttar Pradesh Krishi Utpadan Mandi (Sanshodhan) Adhiniyam, 2018 — उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 25 सन् 1964 की धारा 2 का संशोधन
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2-उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम, 1964, जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है की धारा 2 में,- (क) खण्ड (घ-1) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्:- "(घ-2) मण्डी स्थल के सम्बन्ध में ''शीतगृह'' का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा 7-क के अधीन मण्डी उप स्थल के रूप में घोषित शीतगृह से है।" (ख) खण्ड (ज) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थात्:- "(ज-1) ''निदेशक, कृषि विपणन'' का तात्पर्य राज्य सरकार द्वारा निदेशक, कृषि विपणन के रूप में नियुक्त अधिकारी से है, जो इस अधिनियम के अधीन निदेशक, कृषि विपणन की शक्तियों और कृत्यों का निर्वहन करेगा ; (ज-1क) विनिर्दिष्ट कृषि उत्पाद के सम्बन्ध में "सीधा विपणन" का तात्पर्य, प्रधान मण्डी स्थल, उप.मण्डी स्थल, निजी मण्डी स्थल एवं मण्डी उप.स्थल के बाहर प्रसंस्करणकर्ताओं, निर्यातकों, क्रेताओं आदि के द्वारा कृषकों से विनिर्दिष्ट कृषि उत्पाद के सीधा थोक क्रय से है ; (ज-1ख) ''कृषक उत्पादक संगठन''(एफ0पी0ओ0) का तात्पर्य ऐसे कृषक-संगम से है, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी भी नाम/प्रारूप में अभिहित किया जाता हो/विद्यमान हो एवं रजिस्ट्रीकृत हो। जो कृषकों कों गतिशील करने और उनके उत्पादन तथा विपणन शक्ति की सामूहिक उत्तोलन क्षमता का सृजन करता है।" (ग) खण्ड (ट-1) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्:- "(ट-2) मण्डी उप.स्थल का तात्पर्य भाण्डागार/साइलो/शीतगृह या ऐसी अन्य संरचना या स्थान से है, जो इस अधिनियम की धारा 7-क के अधीन मण्डी उप.स्थल के रूप में घोषित किया गया हो।" (घ) खण्ड (ड) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्:- "(ड-1) 'व्यक्ति' के अन्तर्गत व्यक्ति, कोई सहकारी समिति, हिन्दू अविभाजित परिवार, निगमित अथवा अनिगमित कोई कम्पनी या फर्म या व्यक्ति-संगम या निकाय सम्मिलित है।" (ङ) खण्ड (ण-1) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थात्:- "(ण-2) 'निजी मण्डी स्थल' का तात्पर्य मण्डी क्षेत्र में प्रधान मण्डी स्थल, उपमण्डी स्थल और मण्डी उप-स्थल से भिन्न ऐसे स्थान से है, जहाँ इस अधिनियम के अधीन उक्त प्रयोजन के लिए कृषि उत्पाद के विपणन और लाइसेंस धारण करने के लिए किसी व्यक्ति द्वारा अवसंरचना विकसित की गयी हो और उसका प्रबन्ध किया गया हो ; (ण-3) कृषि उत्पाद के सम्बन्ध में 'प्रसंस्करणकर्ता' का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो स्वयं की ओर से या प्रभार के संदाय पर किसी अधिसूचित कृषि उत्पाद के प्रसंस्करण का दायित्व ग्रहण करता हो।" (च) खण्ड (ध) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थात्:- "(ध-1) 'साइलो' का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा 7-क के अधीन मण्डी उप.स्थल के रूप में घोषित साइलो से है; (ध-2) 'विशिष्ट जिन्स मण्डी स्थल' का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा 7-ग के अधीन यथाअधिसूचित किसी मण्डी स्थल से है।" (छ) खण्ड (न) के पश्चात निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्:- "(न-1) 'राज्य' का तात्पर्य भारत का संविधान की प्रथम अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट किसी राज्य से है।" (ज) खण्ड (कक) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्:- "(कक-1) मण्डी स्थल के सम्बन्ध में 'भाण्डागार' का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा 7-क के अधीन मण्डी उप-स्थल के रूप में घोषित भाण्डागार से है।"