Section 2 of The Uttar Pradesh Industrial Area Development (Amendment) Act, 2016 — धारा 2 का संशोधन
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2-उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976, जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है, की धारा 2 में,— (क) खण्ड (क) में— (एक) शब्द “मार्ग” के स्थान पर शब्द “मार्ग, पुल, उपरिगामी सेतु, भूमिगत पारपथ” रख दिये जायेंगे; (दो) शब्द “टाउन रिफ्यूज” के स्थान पर शब्द “स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं, शिक्षा, परिवहन, आपदा प्रबंधन, ईंधन, पावर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ब्राड बैण्ड कनेक्टिविटी और गैस पाइप लाइन” रख दिये जायेंगे; (ख) खण्ड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थातः— “(ख-1) 'भवन' में कोई संरचना या निर्माण या उसका भाग सम्मिलित है जो किसी आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत, औद्योगिक या किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जा रहा है या उपयोग में लाये जाने के योग्य है और उस पर कब्जा है या कब्जा किये जाने योग्य है”; (ग) खण्ड (ग) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थात्ः— “(ग-1) 'कम्पनी' का तात्पर्य, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए कम्पनी अधिनियम, 2013 के अधीन निगमित किसी कम्पनी या इसके सांविधिक उपान्तरण से है जिसमें सम्पूर्ण दत्त अंशपूंजी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकार द्वारा धृत है या अंशतः राज्य सरकार द्वारा और अंशतः केन्द्र सरकार द्वारा धृत है ; (ग-2) 'विकास' का इसके व्याकरणिक भिन्नताओं सहित तात्पर्य है किसी भूमि या भवन पर किसी संगठित क्रियाकलाप को करना जिसमें कोई परिवर्तन भी है जो वित्तीय व्ययों के कारण हुआ है और जिससे दर योग्य मूल्यों में वृद्धि हो सकती है और इसमें पुनर्विकास भी है; (ग-3) 'आर्थिक क्रियाकलाप' में औद्योगिक, विनिर्माण, वाणिज्यिक, वित्तीय, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लाजिस्टिक, परिवहन, पर्यटन, आतिथ्य सत्कार, स्वास्थ्य, आवास, मनोरंजन, शोध और विकास, शिक्षा और प्रशिक्षण, सूचना और संचार, प्रबन्धन और परामर्श, सुविधाओं के विकास और अनुरक्षण से जुड़ी गतिविधियां और सेवायें और ऐसे अन्य आर्थिक क्रियाकलाप हैं जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे”; (घ) खण्ड (घ) के पश्चात निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थातः— “(घ-1) 'औद्योगिक टाउनशिप' का तात्पर्य भारत का संविधान के अनुच्छेद 243थ के खण्ड (1) के परन्तुक के अधीन राज्यपाल द्वारा, अधिसूचना द्वारा इस रूप में विनिर्दिष्ट औद्योगिक टाउनशिप से है; (घ-2) 'अवसंरचना परियोजना' का तात्पर्य किसी परियोजना से है जिसे ऐसी अवसंरचना, सुख-साधन, सुविधाओं या सेवाओं से है, जो विशेष निवेश क्षेत्र या औद्योगिक विकास क्षेत्र के सुगम और उत्कृष्ट कार्यों के लिए अपेक्षित हों, के विकास के लिए लिया गया है या लिया जाना है”; (ङ) खण्ड (ङ) के पश्चात निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थातः— “(ङ-1) 'स्थल' का तात्पर्य किसी भूमि या भवन या दोनों के चिन्हित अंश से है; (ङ-2) 'विशेष निवेश क्षेत्र' का तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (1-क) के अधीन राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस रूप में घोषित क्षेत्र से है; (च) खण्ड (च) के पश्चात निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिये जायेंगे, अर्थातः— “(च-1) 'इकाई' का तात्पर्य औद्योगिक विकास क्षेत्र या विशेष निवेश क्षेत्र में किसी आर्थिक कार्यकलाप को चलाने के प्रयोजन से किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित किसी इकाई या उपक्रम से है; (च-2) 'उपभोक्ता प्रभार' का तात्पर्य प्राधिकरण या प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य इकाई द्वारा उद्गृहीत प्रभारों से है”।