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Section 19 of The Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 in hindi
- (1)कोई व्यक्ति] जो वेश्यावृत्ति कर रहा है या जिससे वेश्यावृत्ति करवाई जा रही है, उस मजिस्ट्रेट को जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर वह वेश्यावृत्ति कर रहा है या उससे वेश्यावृत्ति करवाई जा रही है, इस आदेश के लिए आवेदन कर सकेगा कि-- (क) उसे संरक्षागृह में रख दिया जाए, या (ख) न्यायालय द्वारा उसकी देख-रेख और उसका संरक्षण उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट रीति से किया जाए ।
- (2)मजिस्ट्रेट उपधारा (3) के अधीन कोई जांच लम्बित रहने तक यह निदेश दे सकेगा कि “ृव्यक्ति] को ऐसी अभिरक्षा में रखा जाए जो वह मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित समझे ।
- (3)यदि मजिस्ट्रेट का समाधान, आवेदक को सुनने और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह आवश्यक समझता है, और जिसके अन्तर्गत अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, ।958 (958 का 20) के अधीन नियुक्त किसी परिवीक्षा अधिकारी द्वारा आवेदक के व्यक्तित्व, घर की परिस्थितियों और पुनर्वासन की संभावनाओं के बारे में जांच भी है, हो जाता है कि इस धारा के अधीन आदेश किया जाना चाहिए तो वह लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से यह आदेश करेगा कि आवेदक को,-- ! |1986 के अधिनियम सं ० 44 की धारा 20 द्वारा (26--987 से) अंतःस्थापित । 2 |1986 के अधिनियम सं ० 44 की धारा 20 द्वारा (26-- 987 से) “एक वर्ष की समाप्ति” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 3 1978 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 4 द्वारा (2-0-979 से) धारा 9 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1986 के अधिनियम सं ० 44 की धारा 4 द्वारा (26--987 से) “स्त्री या लड़की” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (0 किसी संरक्षागृह में, या
- (1)किसी सुधार संस्था में, या (ऐ) मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के पर्यवेक्षण के अधीन, ऐसी अवधि के लिए जो आदेश में विनिर्दिप्ट की जाए, रखा जाए ।]