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Section 13 of The Architects Act, 1972 in hindi
परिषद् की वित्त व्यवस्था
- (1)परिषद् के प्रबन्ध और नियंत्रण के अधीन एक निधि स्थापित की जाएगी जिसमें परिषद् को प्राप्त सभी धन जमा किए जाएंगे और परिषद् द्वारा उचित रूप से उपगत सभी व्यय और दायित्व उसमें से पूरे किए जाएंगे।
- (2)परिषद् निधि में तत्समय जमा किसी भी धन को किसी सरकारी प्रतिभूति में अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी अन्य प्रतिभूति में विनिहित कर सकेगी।
- (3)परिषद् निधि के उचित लेखे, आमदनी से पूंजी को सुभिन्न रखते हुए, रखेगी।
- (4)परिषद् के वार्षिक लेखाओं की संपरीक्षा ऐसे संपरीक्षक द्वारा की जा सकेगी जिसे परिषद् प्रतिवर्ष नियुक्त करे।
- (5)प्रत्येक वर्ष के अन्त में, यथासाध्य शीघ्र, किन्तु ठीक अगले वर्ष के सितम्बर के तीसवें दिन के अपश्चात्, परिषद् उस वर्ष के लिए परिषद् के संपरीक्षित लेखाओं की प्रति तथा परिषद् की रिपोर्ट राजपत्र में प्रकाशित कराएगी और उक्त लेखाओं तथा रिपोर्ट की प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएंगी।
- (6)निधि निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :— (क) केन्द्रीय सरकार से अनुदान, दान या निक्षेप के रूप में प्राप्त सभी धन; (ख) इस अधिनियम के अधीन प्राप्त कोई राशियां, चाहे वे फीस के रूप में हों या अन्यथा।
- (7)परिषद् के नाम जमा सभी ऐसा धन, जिसका तुरन्त उपयोजन नहीं किया जा सकता, भारतीय स्टेट बैंक में अथवा बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की प्रथम अनुसूची के स्तम्भ 2 में विनिर्दिष्ट किसी अन्य बैंक में जमा किया जाएगा।