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Section 6 of The Requisitioning and Acquisition of Immovable Property Act, 1952 in hindi
- (1)इस अधिनियम के अधीन अधिगृहीत किसी सम्पत्ति को केन्द्रीय सरकार किसी भी समय निर्मुक्त कर सकेगी और यथासाध्य सम्पत्ति को उतनी अच्छी हालत में, जिनती अच्छी हालत में वह उस समय थी, जब उसका कब्जा लिया गया था, युक्तियुक्त अवक्षयण और अप्रतिरोध्य शक्ति द्वारा कारित परिवर्तनों सहित प्रत्यावर्तित कर सकेगी : परन्तु जहां कि वे प्रयोजन, जिनके लिए किसी अधिगृहीत सम्पत्ति का प्रयोग किया जा रहा था, अस्तित्वहीन हो जाते हैं, वहां केन्द्रीय सरकार यथाशीघ्र अधिग्रहण से उस सम्पत्ति को तब निर्मक्त कर सकेगी जब तक कि वह सम्पत्ति धारा 7 के अधीन अर्जित नहीं की जाती है। '[(।क) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार अधिग्रहण से,-- (क) स्थावर सम्पत्ति अधिग्रहण और अर्जन (संशोधन) अधिनियम, 970 (970 का ) के प्रारंभ से पूर्व इस अधिनियम के अधीन अधिगृह्दीत या अधिगृहीत समझी जाने वाली किसी सम्पत्ति को ऐसे प्रारंभ से “[सत्रह्म वर्ष| की कालावधि के अवसान पर या उसके पूर्व, (ख) ऐसे प्रारंभ के पश्चात् इस अधिनियम के अधीन अधिगृहीत किसी सम्पत्ति को, उस तारीख से जिस तारीख को ऐसी सम्पत्ति का कब्जा सक्षम प्राधिकारी को धारा 4 के अधीन अभ्यर्पित या परिदत्त किया गया था या उसके द्वारा लिया गया था, पांच वर्ष की कालावधि के अवसान पर या उसके पूर्व, तब निर्मुक्त करेगी, जब कि उपर्युक्त “[सत्रह वर्ष] की अवधि के अन्दर धारा 7 के अधीन ऐसी सम्पत्ति अर्जित नहीं कर ली जाती ।]
- (2)जहां कि कोई सम्पत्ति उपधारा (1) या उपधारा (क) के अधीन अधिग्रहण से निर्मुक्त की जानी है, वहां सक्षम प्राधिकारी ऐसी जांच के पश्चात् यदि कोई हो, जिसे वह किसी मामले में करना या कराना आवश्यक समझे, लिखित आदेश द्वारा वह व्यक्ति विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिसको सम्पत्ति का कब्जा दिया जाएगा और ऐसा कब्जा यथासाध्य उस व्यक्ति को दिया जाएगा जिससे अधिग्रहण के समय कब्जा लिया गया था या ऐसे व्यक्ति के हित-उत्तराधिकारियों को दिया जाएगा ।
- (3)उपधारा (2) के अधीन किसी आदेश में विनिर्दिष्ट व्यक्ति को सम्पत्ति के कब्जे का परिदान केन्द्रीय सरकार के लिए उस सम्पत्ति के बारे में समस्त दायित्वों से उन्मोचन होगा, किन्तु यह बात उस सम्पत्ति के सम्बन्ध में किन्हीं अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी जिन्हें कोई अन्य व्यक्ति विधि की सम्यक् प्रक्रिया द्वारा उस व्यक्ति के विरुद्ध प्रवृत्त कराने का हकदार है जिसको सम्पत्ति का कब्जा दिया गया है ।
- (4)जहां कि कोई व्यक्ति, जिसको अधिगृहीत सम्पत्ति का कब्जा दिया जाना है, नहीं पाया जाता और उसकी ओर से कोई अभिकर्ता या कोई व्यक्ति परिदान स्वीकार करने के लिए सशक्त नहीं है, वहां सक्षम प्राधिकारी एक सूचना यह घोषित करते हुए कि सम्पत्ति अधिग्रहण से निर्मुक्त की जाती है । सम्पत्ति के किसी सहज-दृश्य भाग पर लगवाएगा और राजपत्र में भी प्रकाशित कराएगा ।
- (5)जबकि उपधारा (4) में निर्दिष्ट सूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाती है, तब ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट सम्पत्ति ऐसे प्रकाशन की तारीख को और उससे अधिग्रहण के अधीन न रह जाएगी और उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसका परिदान उस व्यक्ति को किया गया है जो उसका हकदार है और उस तारीख के पश्चात् किसी भी कालावधि के लिए उस सम्पत्ति के सम्बन्ध में किसी प्रतिकर या अन्य दावे के लिए केन्द्रीय सरकार दायी नहीं होगी ।
- (6)जहां कि इस अधिनियम के अधीन अधियृहीत कोई सम्पत्ति या उसका कोई महत्वपूर्ण भाग सम्पूर्णतः नष्ट हो जाता है या सारतः और स्थायी रूप से उस प्रयोजन के लिए, जिसके लिए उसे अधिगृहीत किया गया था, अग्नि, भूचाल, आंधी, बाढ़ या किसी सेना या भीड़ या अन्य अप्रतिरोध्य बल के कारण अनुपयुक्त हो गया है, वहां केन्द्रीय सरकार के विकल्प पर वह अधिग्रहण शून्य होगा : परन्तु जहां कि उस सम्पत्ति को क्षति उस सरकार के दोपषपूर्ण कार्य या व्यतिक्रम से हुई है, वहां इस उपधारा का फायदा केन्द्रीय सरकार को उपल्य नहीं होगा ।