Section 24 of The Religious endowments act, 1863 in hindi
धार्मिक विन्यास अधिनियम, 863' (1863 का अधिनियम संख्यांक 20) [0 मार्च, 863] सरकार को धार्मिक विन्यासों के प्रबन्ध से अपने को निर्निहित करने के वास्ते समर्थ बनाने के लिए अधिनियम उद्देशिका--यह समीचीन है कि बंगाल में फोर्ट विलियम की प्रेसिडेन्सी में और फोर्ट सेन्ट जार्ज की प्रेसिडेन्सी में राजस्व बोर्डों और स्थानीय अभिकर्ताओं को बंगाल संहिता के विनियम 9, 80 (बंगाल विनियम, 80 का 9) द्वारा (मजिस्दों, हिन्दू मंदिरों, महाविद्यालयों की संभाल और अन्य प्रयोजनों के लिए अनुदान की गई भूमियों के किराए और उपज के सम्यक् विनियोग के लिए; पुलों, सरायों, क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक भवनों के अनुरक्षण और मरम्मत के लिए और नजूल सम्पत्ति या राजगामी सम्पत्ति की अभिरक्षा और निपटान के लिए), और मद्रास संहिता के विनियम 7, 87 द्वारा (मस्जिदों, हिन्दू मंदिरों और महाविद्यालयों की सम्भाल या अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनुदान की गई भूमियों के किराए और उपज के सम्यक् विनियोग के लिए; पुलों, चौल्ट्रियों, या सत्रमों और अन्य सार्वजनिक भवनों के अनुरक्षण और मरम्मत के लिए; और राजगामी सम्पत्ति की अभिरक्षा और निपटान के लिए) उन पर अधिरोपित कर्तव्यों से वहां तक अवमुक्त कर दिया जाए जहां तक उन कर्तव्यों में मजिस्दों या हिंदू मंदिरों की सम्भाल के लिए और अन्य धार्मिक उपयोगों के लिए अनुदान की गई भूमियों का अधीक्षण; ऐसे धार्मिक स्थापनों के अनुरक्षण के लिए बनाए गए विन्यासों का विनियोग; उनसे सम्बन्धित भवनों की मरम्मत और परिरक्षण, और उनके न्यासियों या प्रबन्धकों की नियुक्ति सम्मिलित है अथवा ऐसे धार्मिक स्थापनों 2+** के प्रबन्ध से किसी प्रकार का संबंध अन्तर्ग्स्त है; अत: निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-- . [80 के बंगाल विनियम 9 और 87 के मद्रास विनियम 7 के कुछ भागों का निरसन ।] निरसन अधिनियम, 870 (870 का 4) की धारा । तथा अनुसूची द्वारा निरसित । 2. निर्वचन-खण्ड--इस अधिनियम में-- उन जे जे कक कक ' संक्षिप्त नाम, भारतीय संक्षिप्त नाम अधिनियम, 897 (897 का 4) द्वारा दिया गया । यह अधिनियम धार्मिक विन्यास (कनारा पर विस्तारित) अधिनियम, 865 (865 का बम्बई अधिनियम सं ० 7) द्वारा कनारा को विस्तारित किया गया जिसे विशेष रूप से इसी प्रयोजन के लिए पारित किया गया । अनुसूचित जिला अधिनियम, 874 (874 का 4 ) की धारा 3(क) के अधीन अधिसूचना द्वारा यह निम्नलिखित अनुसूचित जिलों में प्रवृत्त घोषित किया गया है. अर्थात् :-- हजारी बाग, लोहारदागा (अब जिला रांची, कलकत्ता राजपत्र, 899, भाग 7, पृ० 44 देखिए) तथा मानभूम जिलों और सिंहभूम जिले में परगना दालभूम तथा कोल्हन भारत का राजपत्र, 88], भाग ।. पृ० 504 देखिए । मिर्जापुर जिले का अनुसूचित भाग... द भारत का राजपत्र, ।879, भाग ।, पृ०383, देखिए । जौनसार बाबर कि कि कि भारत का राजपत्र, 879, भाग ।, पृ० 382, देखिए । गंजाम और विशाखापत्तनम के अनुसूचित जिले... भारत का राजपत्र, 898, भाग ], पृ० 870, देखिए । असम (नार्थ लुशाई हिल्स को छोड़कर) दर भारत का राजपत्र, 897, भाग ।, पृ० 299, देखिए । इसका पश्चात्वर्ती उल्लिखित अधिनियम की धारा 5 के अधीन अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित अनुसूचित जिलों पर विस्तार किया गया है, अर्थात् :-- कुमाऊं और गढ़वाल... दि दि भारत का राजपत्र, 876, भाग ।, पृ० 606, देखिए । आगरा प्रान्त की तराई दि दि भारत का राजपत्र, 876, भाग ।, पृ० 505, देखिए । अजमेर और मेरवाड़ा दि दि भारत का राजपत्र, 877, भाग ।, पृ० 605, देखिए । 963 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (-7-965 से) यह अधिनियम दादरा और नागर हवेली पर विस्तारित किया गया एवं प्रवृत्त हुआ । धारा रा भाग ख राज्यों के सिवाय संपूर्ण भारत पर लागू होती है । मद्रास हिन्दू रिलिजियस एण्डाऊमेंट्स ऐक्ट, 926 (927 का मद्रास अधिनियम सं० 2) द्वारा मद्रास में हिन्दू धार्मिक विन्यास तक और उड़ीसा हिन्दू 'रिलिजियस एण्डाऊमेंट्स, ।939 (939 का उड़ीसा अधिनियम सं ० 4) द्वारा उड़ीसा में अधिनियम निरसित किया गया तथा बंगाल वकक््फ ऐक्ट, 934 (934 का बंगाल अधिनियम सं ० ]3) द्वारा बंगाल में संशोधित । यह अधिनियम बिहार राज्य के किसी धार्मिक न्यास पर लागू नहीं होगा (95। का बिहार अधिनियम सं ० ]) । 1964 के अधिनियम सं० 34 द्वारा यह अधिनियम किसी ऐसे वक्फ पर लागू नहीं होगा जिसे वक््फ अधिनियम, 954 (1954 का अधिनियम सं ० 29) लागू होता हो । 959 के मद्रास अधिनियम सं ० 22 द्वारा यह अधिनियम मद्रास राज्य में प्रवृत्त नहीं रहेगा । 2 ।1874 के अधिनियम सं० 6 की धारा । और अनुसूची द्वारा “और यह मजिस्दों, हिन्दू मंदिरों की संभाल या अन्य धार्मिक प्रयोजनों के लिए विन्यास से सम्बन्धित बंगाल संहिता के विनियम 9, 80 तथा मद्रास संहिता के विनियम सं ० 7, ।87 का निरसन उस प्रयोजन के लिए समीचीन है,” शब्दों और अक्षरों को निरसित किया गया । 3 94 के अधिनियम सं० 0 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा “संख्या” और “लिंग” से सम्बन्धित खण्ड निरसित ।
“सिविल न्यायालय” और “न्यायालय”--“सिविल न्यायालय” और “न्यायालय” शब्दों से, '[धारा 0 में यथा उपबन्धित के सिवाय] अभिप्रेत है उस जिले में आरम्भिक सिविल अधिकारिता वाला प्रधान न्यायालय जिसमें, [या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अन्य न्यायालय जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर] वह मस्जिद, मंदिर या धार्मिक स्थापन स्थित है जिसके सम्बन्ध में या जिसके विन्यास के सम्बन्ध में इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन कोई वाद संस्थित किया जाएगा या आवेदन दिया जाएगा ।
3. मस्जिदों आदि के बारे में सरकार द्वारा विशेष उपबन्ध किया जाना--प्रत्येक ऐसी मस्जिद, मंदिर या अन्य धार्मिक स्थापन के मामले में, जिसको [इस अधिनियम की उद्देशिका] में विनिर्दिष्ट विनियमों में से किसी के उपबन्ध लागू हैं और जिसके न्यासी, प्रबन्धक, या अधीक्षक का नामनिर्देशन, इस अधिनियम के पारित होने के समय सरकार या किसी लोक अधिकारी में निहित है, या उसके द्वारा किया जा सकता है, या जिसमें ऐसे न्यासी, प्रबन्धक या अधीक्षक का नामनिर्देशन सरकार या किसी लोक अधिकारी द्वारा पुष्टि के अधीन है, राज्य सरकार इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र इसमें इसके पश्चात् यथा उपबन्धित विशेष उपबन्ध करेगी ।
4. राजस्व बोर्ड के भाराधीन न्यास सम्पत्ति का न्यासियों आदि को अन्तरण--प्रत्येक ऐसी मस्जिद, मन्दिर, या अन्य धार्मिक स्थापन के मामले में, जो इस अधिनियम के पारित होने के समय, किसी ऐसे न्यासी, प्रबन्धक या अधीक्षक के प्रबन्ध के अधीन है, जिसका नामनिर्देशन न तो सरकार या किसी लोक अधिकारी में निहित है, न उसके द्वारा किया जा सकता है और न उसकी पुष्टि के ही अधीन है, राज्य सरकार इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात् यथाशक््य शीघ्र, ऐसी सम्पत्ति के सिवाय जो इसमें इसके पश्चात् उपबन्धित है, उस समस्त भू-सम्पत्ति या अन्य सम्पत्ति को, जो इस अधिनियम के पारित होने के समय राजस्व बोर्ड या किसी स्थानीय अभिकर्ता के कब्जे में या अधीक्षण के अधीन है और ऐसी मस्जिद, मन्दिर या अन्य धार्मिक स्थापन की है, ऐसे न्यासी, प्रबन्धक या अधीक्षक को अन्तरित करेगी ।
ऐसी सम्पत्ति के बारे में बोर्ड की शक्तियों की समाप्ति--और ऐसी मस्जिद, मन्दिर या अन्य धार्मिक स्थापन के बारे में, और इस प्रकार अन्तरित समस्त भूमि और अन्य सम्पत्ति के बारे में, राजस्व बोर्ड और स्थानीय अभिकर्ताओं की शक्तियां और उत्तरदायित्व वहां तक के सिवाय जहां तक वे ऐसे अन्तरण के पूर्व उक्त राजस्व बोर्ड या किसी स्थानीय अभिकर्ता द्वारा किए गए कार्य और उपगत दायित्व के बारे में हैं, समाप्त और पर्यवसित हो जाएंगे ।