Section 6A of The Provident Funds Act, 1925 in hindi
सेवानिवृत्ति के दो वर्ष के भीतर पूर्व अनुज्ञा के बिना वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने वाले केन्द्रीय सरकार के
अधिकारियों की दशा में सरकारी अंशदानों को रोक लेना या उनकी वूसली--(1) इस धारा में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:-
(क) “केन्द्रीय सरकार का अधिकारी” से केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई अंशदायी भविष्य निधि में कोई ऐसा अभिदायकर्ता या निक्षेपकर्ता अभिप्रेत है, जो अपनी सेवानिवृत्ति के ठीक पूर्व केन्द्रीय सेवा वर्ग । का सदस्य है, किन्तु किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए किसी सेवा-संविदा के अधीन नियुक्त किया गया कोई अधिकारी इसके अन्तर्गत नहीं है;
(ख) “वाणिज्यिक नियोजन” से व्यापारिक, वाणिज्यिक औद्योगिक वित्तीय या वृत्तिक कारबार में लगी हुई किसी कम्पनी, सहकारी सोसाइटी, फर्म या व्यप्टि के अधीन (अभिकर्ता की हैसियत सहित) किसी भी हैसियत में नियोजन अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं :--
- (1)किसी कम्पनी का निदेशक पद; (#) किसी सहकारी सोसाइटी में अध्यक्ष, सभापति, प्रबन्धक, सचिव, कोषपाल जैसे किसी भी नाम से ज्ञात किसी पद को, चाहे वह निर्वाचित हो या न हो, धारण करना; और
- (1)ऐसे विषयों में सलाहकार या परामर्शी के तौर पर या तो स्वतंत्र रूप से या किसी फर्म के भागीदार के रूप में व्यवसाय प्रारम्भ करना, जिनकी बावत-- (क) केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के पास कोई वृत्तिक अर्हताएं नहीं हैं और वे विषय, जिनकी बाबत ऐसा व्यवसाय प्रारम्भ किया जाना है या चलाया जाता है, उसकी शासकीय जानकारी या अनुभव से सम्बद्ध हैं, या (ख) केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के पास वृत्तिक अर्हताएं हैं, किन्तु वे विषय, जिनकी बाबत ऐसा व्यवसाय प्रारम्भ किया जाना है, ऐसे हैं जिनसे यह सम्भव है कि केन्द्रीय सरकार के अधीन उनके द्वारा धारित पदों के कारण उसके व्यवहारियों को नावाजिब फायदा हो; या (ग) केन्द्रीय सरकार के अधिकारी को ऐसे कार्य का भार ग्रहण करना है जिसमें केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों या अधिकारियों से सम्पर्क या संबंध अन्तर्गस्त है, किन्तु किसी ऐसे निगम या कंपनी में या उसके अधीन नियोजन, जो पूर्ण रूप से या पर्याप्त रूप से सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है अथवा किसी ऐसे निकाय में या उसके अधीन नियोजन, जो पूर्ण रूप से या पर्याप्त रूप से सरकार के नियंत्रण में है या उसके द्वारा वित्तपोषित किया जाता है, इसके अन्तर्गत नहीं है; (ग) “सरकारी अंशदान” से भविष्य निधि (संशोधन) अधिनियम, 975 के प्रारंभ होने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा या किसी राज्य सरकार द्वारा या स्थानीय प्राधिकारी उधार अधिनियम, 94 (94 का 9) के अर्थ में किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् किसी अवधि की बाबत किए गए अंशदान अभिप्रेत हैं; (घ) “विहित” से केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
- (2)केन्द्रीय सरकार के किसी भी अधिकारी को, उस दशा में जब वह अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय, केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना, वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है, किसी अंशदायी भविष्य निधि में उसके नाम में जमा किए गए, सरकारी अंशदानों के संबंध में कोई अधिकारी नहीं होगा । स्पष्टीकरण --इस उपधारा और उपधारा (7) के प्रयोजनों के लिए “सेवानिवृत्ति की तारीख” से सेवानिवृत्ति के पश्चात् केन्द्रीय सरकार के अधीन उसी या किसी अन्य वर्ग । पद पर या किसी राज्य सरकार के अधीन वैसे ही किसी अन्य पद पर सेवा-विच्छेद ]1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 3 द्वारा “जिससे कि निधि गठित हुई है” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 2 [1925 के अधिनियम सं० 28 की धारा 3 द्वारा “उस प्राधिकरण” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 3 |1925 के अधिनियम सं ० 28 की धारा 3 द्वारा “उस प्राधिकरण के नियोजन” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 4 1975 के अधिनियम सं० 46 की धारा 2 द्वारा (7-2-977 से) अन्त:स्थापित । के बिना पुनर्नियोजित केन्द्रीय सरकार के अधिकारी के संबंध में वह तारीख अभिप्रेत होगी जिसको केन्द्रीय सरकार का ऐसा अधिकारी सरकारी सेवा में अन्तत: पुनर्नियोजित नहीं रहता । स्पष्टीकरण 2--केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी के बारे में, जिसे उसकी सेवा-निवृत्ति पूर्व छुट्टी के दौरान किसी विशिष्ट वाणिज्यिक नियोजन को ग्रहण करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुज्ञा दी गई है, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसने सेवानिवृत्ति के पश्चात् ऐसे नियोजन में अपने बने रहने के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा प्राप्त कर ली है ।
- (3)उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए यह है कि केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी द्वारा विहित प्ररूप में आवेदन किए जाने पर, केन्द्रीय सरकार लिखित आदेश द्वारा ऐसे अधिकारी को, उस आवेदन में विनिर्दिष्ट वाणिज्यिक नियोजन को ग्रहण करने के लिए ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो वह आवश्यक समझे, अनुज्ञा दे सकती है, या ऐसे कारणों से, जो आदेश में अभिलिखित किए जाएंगे, अनुज्ञा देने से इन्कार कर सकती है ।
- (4)केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए इस धारा के अधीन अनुज्ञा देने में या देने से इन्कार करने में, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों को ध्यान रखेगी, अर्थात् :-- (क) जिस नियोजन को ग्रहण करने का विचार है उसकी प्रकृति और नियोजन के पूर्ववृत्त; (ख) कया उस नियोजन में, जिसे ग्रहण करने का उसका विचार है, उसके कर्तव्य ऐसे हो सकते हैं जिनसे उसे सरकार का विरोध करना पड़े; (ग) क्या ऐसे अधिकारी ने सेवा के दौरान उस नियोजक के साथ, जिसके अधीन उसका नियोजन प्राप्त करने का विचार है, ऐसे कोई संव्यवहार किए थे जो इस संदेह के लिए युक्तियुक्त आधार हो सकते हैं कि ऐसे अधिकारी ने उस नियोजक के साथ पक्षपात किया था; (घ) कोई अन्य सुसंगत बातें जो विहित की जाएं ।
- (5)यदि उपधारा (3) के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर, केन्द्रीय सरकार ऐसी अनुज्ञा देने से इन्कार नहीं करती है जिसके लिए आवेदन किया गया है, या आवेदक को ऐसे इन्कार की संसूचना नहीं देती है, तो यह समझा जाएगा कि केन्द्रीय सरकार ने ऐसी अनुज्ञा दे दी है जिसके लिए आवेदन किया गया है ।
- (6)यदि केन्द्रीय सरकार ऐसी अनुज्ञा किन्हीं शर्तों के अधीन देती है या ऐसी अनुज्ञा देने से इन्कार करती है जिसके लिए आवेदन किया गया है तो आवेदक, उस आशय के केन्द्रीय सरकार के आदेश की प्राप्ति से तीस दिन के भीतर, किसी ऐसी शर्त या इन्कार के विरुद्ध अभ्यावेदन कर सकता है, और केन्द्रीय सरकार उस पर ऐसे आदेश कर सकती है जो वह ठीक समझे : परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश जो ऐसी शर्त को रद्द करने या किनहीं शर्तों के बिना ऐसी अनुज्ञा देने वाले आदेश से भिन्न है, अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा ।
- (7)यदि केन्द्रीय सरकार का कोई अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी समय केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना, कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करता है या कोई ऐसी शर्त भंग करता है जिस पर कोई वाणिज्यिक नियोजन ग्रहण करने के लिए उसे इस धारा के अधीन अनुज्ञा दी गई है तो केन्द्रीय सरकार लिखित आदेश द्वारा और ऐसे कारणों से, जो उसमें अभिलिखित किए जाएंगे, यह घोषणा करने के लिए सक्षम होगी कि वह ऐसे सरकारी अंशदानों के, जो उस अधिकारी के संबंध में किए गए हों, इतने भाग का हकदार नहीं होगा जितना उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, और यदि वह उसे प्राप्त कर चुका है तो यह निदेश देने के लिए सक्षम होगी कि वह सरकारी अंशदानों के उक्त भाग के बराबर रकम केन्द्रीय सरकार को वापस करे : परन्तु कोई भी ऐसा आदेश, सम्बन्धित अधिकारी को ऐसी घोषणा या निदेश के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर दिए बिना, नहीं किया जाएगा : परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोई आदेश करने में, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगी, अर्थात् :--
- (1)संबंधित अधिकारी की वित्तीय परिस्थिति;
- (1)संबंधित अधिकारी द्वारा ग्रहण किए गए वाणिज्यिक नियोजन की प्रकृति और उससे उपलब्धियां;
- (7)ऐसी अन्य सुसंगत बातें जो विहित की जाएं ।
- (8)यदि कोई ऐसी रकम, जो उपधारा (7) के अधीन किसी आदेश द्वारा वापस की जानी अपेक्षित है, विहित अवधि के भीतर वापस नहीं की जाती है तो वह भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल की जा सकेगी ।
- (9)इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा पारित प्रत्येक आदेश संबंधित अधिकारी को संसूचित किया जाएगा ।
- (0)इस धारा के उपबंध, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में या किसी अंशदायी भविष्य निधि को लागू नियमों में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे । |
- (1)इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]