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Section 15 of The Prasar Bharati (Broadcasting Corporation of India) Act, 1990 in hindi
- (1)प्रसारण परिषद् निम्नलिखित से परिवाद ग्रहण करेगी और उन पर विचार करेगी, अर्थात् :--
- (1)कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो यह अभिकथित करता है कि कोई कार्यक्रम या प्रसारण या निगम का विनिर्दिष्ट मामलों में या साधारणतया कार्यकरण उन उद्देश्यों के अनुसार नहीं है जिनके लिए निगम स्थापित किया गया है,
- (1)कोई व्यक्ति (निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी से भिन्न) जो यह दावा करता है कि निगम के किसी कार्यक्रम के प्रसारण के संबंध में उसके साथ किसी रीति से अन्यायपूर्ण या अनुचित व्यवहार किया गया है (जिसके अंतर्गत उसकी एकांतता का अनधिकृत अतिक्रमण, दुर्व्यपदेशन, विकृति या वस्तुनिष्ठता का अभाव है) ।
- (2)उपधारा (1) के अधीन कोई परिवाद ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के भीतर किया जाएगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
- (3)जो परिवाद प्रसारण परिषद् को प्राप्त होते हैं उन्हें निपटाने के लिए परिषद् ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगी जो वह ठीक समझे ।
- (4)यदि परिवाद पूर्णत: या भागत: न्यायोचित पाया जाता है तो प्रसारण परिषद् कार्यपालक बोर्ड सदस्य को समुचित कार्रवाई करने के लिए सलाह देगी ।
- (5)यदि कार्यपालक बोर्ड सदस्य प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ है तो वह ऐसी सिफारिश को बोर्ड के समक्ष विनिश्चय के लिए रखेगा ।
- (6)यदि बोर्ड भी प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ है, तो वह उसके लिए अपने कारण अभिलिखित करेगा और तद्नुसार प्रसारण परिषद् को सूचित करेगा ।
- (7)उपधारा (5) और उपधारा (6) में किसी बात के होते हुए भी, जहां प्रसारण परिषद् यह समुचित समझे, वहां वह ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, निगम से किसी परिवाद के बारे में अपनी सिफारिशों का प्रसार ऐसी रीति में करने की अपेक्षा कर सकेगी जैसी परिषद् ठीक समझे । अध्याय 3 आस््तियां, वित्त और लेखे