Section 2 of The International Monetary Fund and Bank Act, 1945 in hindi
2. अन्तरराष्ट्रीय निधि और बैंक में संदाय—(1) संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् भारत की संचित निधि में से ऐसी सब धनराशियां जो निम्नलिखित के संदाय के लिए समय-समय पर अपेक्षित हों, संदत्त की जाएंगी:— (क) निधि करार के अनुच्छेद 3 की धारा 3 के पैरा (क) के अधीन अन्तरराष्ट्रीय निधि को, और बैंक करार के अनुच्छेद 2 की धारा 3 के [पैरा (क) और (ग) के अधीन] केन्द्रीय सरकार द्वारा अन्तरराष्ट्रीय बैंक को संदेय अभिदाय; (ख) निधि करार के अनुच्छेद 5 की धारा 11 के अधीन, अन्तरराष्ट्रीय निधि को, और बैंक करार के अनुच्छेद 2 की धारा 9 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अन्तरराष्ट्रीय बैंक को संदेय कोई धनराशियां; (ग) निधि करार के अनुच्छेद 5 की धारा 8 या अनुच्छेद 20 की धारा 2, धारा 3 या धारा 5 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अन्तरराष्ट्रीय निधि को संदेय कोई प्रभार; (घ) निधि करार के अनुच्छेद 13 की धारा 3 में निर्दिष्ट केन्द्रीय सरकार की गारंटी को कार्यान्वित करने के लिए अपेक्षित कोई धनराशियां; [(घघ) ऐसे कोई निर्धारण, जिनका निधि करार के अनुच्छेद 20 की धारा 4 या धारा 5 के अधीन अन्तरराष्ट्रीय निधि को केन्द्रीय सरकार द्वारा दिया जाना अपेक्षित हो;] (ङ) ऐसा कोई प्रतिकर, जिसका निधि करार की अनुसूची झ, अनुसूची ञ या अनुसूची ट के अधीन अन्तरराष्ट्रीय निधि या उसके किसी सदस्य को केन्द्रीय सरकार द्वारा दिया जाना अपेक्षित हो। (2) यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना ठीक समझे, तो वह ऐसे प्ररूप में, जिसे वह ठीक समझे, ऐसे कोई ब्याज रहित और अपक्राम्य नोट या अन्य बाध्यताएं, जिनके लिए निधि करार के अनुच्छेद 3 की धारा 4 और बैंक करार के अनुच्छेद 5 की धारा 12 में उपबंध है, सृष्ट कर सकेगी और अन्तरराष्ट्रीय निधि या अन्तरराष्ट्रीय बैंक को पुरोधृत कर सकेगी।