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Section 8 of The India International Arbitration Centre Act, 2019 in hindi
(क) वह कोई अनुन्मोचित दिवालिया है; या जता (ख) वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय (अंशकालिक सदस्य के सिवाय) किसी संदाययुक्त नियोजन में नियोजित होता है; या (ग) उसे ऐसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है; या (घ) उसने ऐसे वित्तीय या अन्य हित अर्जित किए हैं, जिनके कारण सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या (ड) उसने अपनी हैसियत का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बना रहना लोकहित के प्रतिकूल हो गया है; या (च) वह सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया है।
- (2)उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी सदस्य को उस उपधारा के खंड (घ) और खंड (ड) मे विनिर्दिष्ट आधारों पर उसके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उच्चतम न्यायालय द्वारा, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त उसे किए गए किसी प्रतिनिर्देश पर, उच्चतम न्यायालय द्वारा इस निमित्त विहित की जाने वाली प्रक्रिया के अनुसार उसके द्वारा की गई जांच पर यह रिपोर्ट न किया गया हो कि सदस्य को ऐसे आधार पर आधारों पर हटाया जाना आवश्यक है।