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Section 9 of The Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 in hindi
- (1)ऐसा हिन्दू पिता जो अपने अप्राप्तवय धर्मज अपत्यों के नैसर्गिक संरक्षक के तौर पर कार्य करने का हकदार हो, उनमें से किसी के लिए भी उस अप्राप्तवय के शरीर के या उस अप्राप्तवय की (धारा 2 में निर्दिष्ट अविभक्त हित से भिन्न) सम्पत्ति के या दोनों के बारे में विल द्वारा संरक्षक नियुक्त कर सकेगा ।
- (2)उपधारा (1) के अधीन की गई नियुक्ति प्रभावी नहीं होगी यदि पिता माता से पूर्व मर जाए किन्तु यदि माता विल द्वारा किसी व्यक्ति को संरक्षक नियुक्त किए बिना मर जाए तो वह नियुक्ति पुनरुज्जीवित हो जाएगी ।
- (3)ऐसी हिन्दू विधवा, जो अपने अप्राप्तवय धर्मज अपत्यों के नैसर्गिक संरक्षक के तौर पर कार्य करने की हकदार हो और ऐसी हिन्दू माता, जो अपने अप्राप्तवय धर्मज अपत्यों के नैसर्गिक संरक्षक के तौर पर कार्य करने की इस कारण हकदार हो कि पिता नैसर्गिक संरक्षक के तौर पर कार्य करने के लिए निर्हकित हो गया है, उनमें से किसी के लिए भी उस अप्राप्तवय के शरीर के या उस अप्राप्तवय के शरीर या (धारा 2 में निर्दिष्ट अविभक्त हित से भिन्न) सम्पत्ति के या दोनों के बारे में विल द्वारा संरक्षक नियुक्त कर सकेगी ।
- (4)ऐसी हिन्दू माता, जो अपने अप्राप्ततय अधर्मज अपत्यों के नैसर्गिक संरक्षक के तौर पर कार्य करने की हकदार हो, उनमें से किसी के लिए भी, उस अप्राप्तवय के शरीर के या उस अप्राप्तवय की सम्पत्ति के या दोनों के बारे में विल द्वारा संरक्षक नियुक्त कर सकेगी ।
- (5)विल द्वारा ऐसे नियुक्त किए गए संरक्षक को अधिकार है कि वह अप्राप्तवय के, यथास्थिति, पिता या माता की मृत्यु के पश्चात् अप्राप्तवय के संरक्षक के तौर पर कार्य करे और इस अधिनियम के अधीन नैसर्गिक संरक्षक के सब अधिकारों का, उस विस्तार तक और उन निबवन्धनों के अध्यधीन, यदि कोई हों, जो इस अधिनियम और उस विल में विनिर्दिष्ट हों, प्रयोग करे ।
- (6)विल द्वारा ऐसे नियुक्त किए गए संरक्षक के अधिकार जहां कि अप्राप्तवय लड़की है, उसके विवाह हो जाने पर समाप्त हो जाएंगे ।