Central
Section 11 of The Enemy Property Act, 1968 in hindi
व्यक्तियों को समन करने और दस्तावेजें मांगने की अभिरक्षक की शक्ति
- (1)अभिरक्षक किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके बारे में उसे यह विश्वास हो कि वह शत्रु-सम्पत्ति से संपृक्त जानकारी देने में समर्थ है, लिखित सूचना द्वारा अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसके समक्ष ऐसे समय और स्थान पर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, हाजिर हो, और अभिरक्षक ऐसे किसी व्यक्ति की उसके बारे में परीक्षा कर सकेगा, उसके कथन को लेखबद्ध कर सकेगा और उससे अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस पर हस्ताक्षर करे ।
- (2)अभिरक्षक लिखित सूचना द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके बारे में उसे यह विश्वास हो कि उसके कब्जे या नियन्त्रण में शत्रु-सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई लेखाबही, पत्र-पुस्तक, बीजक, रसीद या अन्य किसी भी प्रकृति की दस्तावेज है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसे अभिरक्षक के समक्ष उस समय और स्थान पर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, पेश करे, या पेश कराए और उसे उसके द्वारा परीक्षा के लिए प्रस्तुत करे, तथा अभिरक्षक को उसमें की किसी प्रविष्टि की या उसके किसी भाग की प्रतिलिपियां लेने दे । थू(3) अभिरक्षक, उप अभिरक्षक या सहायक अभिरक्षक को, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने या अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजनों के लिए, वही शक्तियां होंगी, जो इस अधिनियम के अधीन निम्नलिखित विषयों के संबंध में किसी मामले पर कार्रवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, ।908 (908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात् :-- (क) दस्तावेजों के प्रकटीकरण और निरीक्षण की अपेक्षा करना ; (ख) किसी व्यक्ति को, जिसके अंतर्गत भूमि, राजस्व और रजिस्ट्रीकरण मामलों से संबद्ध कोई अधिकारी, बैंक अधिकारी या किसी कंपनी का अधिकारी भी है, हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ; (ग) बहियों, दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों को पेश करने के लिए बाध्य करना ; और (घ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।]