State · Delhi
Section 5 of The Delhi Lands (Restrictions on Transfer) Act, 1972 in hindi
- (1)कोई व्यक्ति जो धारा 4 में निर्दिष्ट किसी भूमि का विक्रय, बन्धक, दान या पट्टे द्वारा या अन्यथा अन्तरण करना चाहता है, सक्षम प्राधिकारी को, ऐसी विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, लिखित आवेदन कर सकेगा ।
- (2)उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर सक्षम प्राधिकारी, ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, लिखित आदेश द्वारा, आवेदित अनुज्ञा दे सकेगा या देने से इंकार कर सकेगा।
- (3)सक्षम प्राधिकारी, निम्नलिखित में से एक या अधिक आधारों पर ही, इस धारा के अधीन आवेदित अनुज्ञा देने से इंकार करेगा अन्यथा नहीं, अर्थात्: --
- (1)स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भूमि की आश्यकता है या आवश्यकता होने की संभाव्यता है ;
- (1)विकास अधिनियम की धारा 6 में निर्दिष्ट दिल्ली विकास प्राधिकरण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए भूमि की आवश्यकता है या आवश्यकता होने की संभाव्यता है; (एप) विकास अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (घ) के अर्थ के अन्तर्गत, किसी विकास के लिए या ऐसी चीजों के लिए जैसे सार्वजनिक भवनों और अन्य लोक संकर्मों और उपयोगिताओं, सड़कों, आवास, मनोरंजन, उद्योग, कारबार, बाजारों, विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थाओं, अस्पतालों और सार्वजनिक खुले स्थानों तथा अन्य प्रकार की सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए भूमि की आवश्यकता है या आवश्यकता होने की संभाव्यता है ।
- (4)जहां सक्षम प्राधिकारी आवेदित अनुज्ञा देने से इंकार कर देता है वहां वह ऐसा करने के कारणों को लेखबद्ध करेगा और उसकी एक प्रति आवेदक को संसूचित की जाएगी ।
- (5)जहां इस धारा के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर सक्षम प्राधिकारी आवेदित अनुज्ञा देने से इंकार नहीं करता है या इंकार की संसूचना आवेदक को नहीं देता है, वहां यह समझा जाएगा कि सक्षम प्राधिकारी ने आवेदित अतुज्ञा मंजूर कर दी है ।