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Section 4 of The Commission of Sati (Prevention ) Act, 1987 in hindi
- (1)भारतीय दंड संहिता (860 का 45) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई स्त्री सती कर्म करती है, तो जो कोई सती कर्म करने का, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: दुष्प्रेरण करेगा वह मृत्यु से, या आजीवन कारावास से, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
- (2)यदि कोई स्त्री सती कर्म करने का प्रयत्न करती है, तो जो कोई ऐसे प्रयत्न का प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: दुष्प्रेरण करेगा वह आजीवन कारावास से दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा । स्पष्टीकरण--इस धारा के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित कार्यों में से किसी कार्य या तत्समान कार्यों को भी दुष्प्रेरण समझा जाएगा, अर्थात् :-- (क) किसी विधवा या स्त्री को उसके मृत पति या किसी अन्य नातेदार के शरीर के साथ या पति या ऐसे नातेदार से संबंधित किसी वस्तु, पदार्थ या चीज के साथ, स्वयं का जीवित दहन कर लेने या गड़ जाने के लिए उत्प्रेरित करना, चाहे वह ठीक मानसिक दशा में है या मत्तता या संज्ञाशून्यता की हालत में है या ऐसा कोई अन्य कारण है जो उसकी स्वतंत्र इच्छा के प्रयोग में बाधा डाल रहा है ; (ख) किसी विधवा या स्त्री को यह विश्वास दिलाना कि सती कर्म के परिणामस्वरूप उसे या उसके मृत पति या नातेदार को कुछ आध्यात्मिक लाभ होगा या कुटुम्ब का पूर्ण कल्याण होगा ; (ग) किसी विधवा या स्त्री को, सती कर्म करने के उसके संकल्प में दृढ़ बने रहने के लिए प्रोत्साहित करना और इस प्रकार उसे सती कर्म करने के लिए उकसाना ; (घ) सती कर्म से संबंधित किसी जुलूस में भाग लेना या विधवा या स्त्री को उसके मृत पति या नातेदार के शरीर के साथ शवदाह या श्मशान भूमि तक ले जाकर सती कर्म करने के उसके विनिश्चय में सहायता करना ; (ड) उस स्थान पर, जहां सती कर्म किया जा रहा है, सती कर्म करने के कार्य में या उससे संबंधित किसी अनुष्ठान में सक्रिय सहभागी के रूप में उपस्थित रहना ; (च) विधवा या स्त्री को, जीवित दहन किए या गाड़े जाने से अपने को बचाने से रोकना या उसमें बाधा पहुंचाना ; (छ) सती कर्म के निवारण के लिए पुलिस के कोई कदम उठाने के उसके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुंचाना या हस्तक्षेप करना ।