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Section 49 of The Chief Election Commissioner And Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service And Term of Office) Act, 2023 in hindi
12. निरसन और व्यावृत्ति ।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 (2023 का अधिनियम संख्यांक 49) [28 दिसम्बर, 2023] मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा की शर्तें तथा पदावधि एवं तथा निर्वाचन आयोग द्वारा कारबार के संव्यवहार के लिए प्रक्रिया को विनियमित करने और उनसे संबंधित या उनके आनुष॑गिक विषयों के लिए अधिनियम भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-- अध्याय १ प्रारंभिक 13. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ--(4) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 है ।
- (2)यह उस तारीख! को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे । 21. परिभाषाएं--इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-- (क) “मुख्य निर्वाचन आयुक्त” से संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अधीन और इस अधिनियम के अनुसार नियुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त अभिप्रेत है ; (ख) “निर्वाचन आयोग” से संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (4) में निर्दिष्ट निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है ; (ग) “निर्वाचन आयुक्त” से संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अधीन और इस अधिनियम के अनुसार नियुक्त कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त अभिप्रेत है ; (घ) “खोजबीन समिति” से मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के रूप में नियुक्ति के लिए विचार करने के लिए व्यक्तियों का पैनल तैयार करने हेतु खोजबीन समिति अभिप्रेत है ; (ड) “चयन समिति” से वह चयन समिति अभिप्रेत है, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सिफारिश करती है । अध्याय 2 मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति और पदावधि 3. निर्वाचन आयोग-- निर्वाचन आयोग, निम्नलिखित से मिलकर बनेगा,-- (क) मुख्य निर्वाचन आयुक्त ; और (ख) अन्य निर्वाचन आयुक्तों की उतनी संख्या, जितनी राष्ट्रपति, समय-समय पर नियत करें । 4. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति--मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाएगी । ! 2 जनवरी, 2024, अधिसूचना का०आ० 35(अ) तारीख 2 जनवरी, 2024 द्वारा, भारत के राजपत्र असाधारण, भाग 7 खंड 307) देखिए। 5. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की अहहताएं--मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त, ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाएंगे, जो भारत सरकार के सचिव की पंक्ति के समतुल्य पद धारण कर रहे हैं या कर चुके हैं, तथा जो सत्यनिष्ठा के ऐसे व्यक्ति होंगे, जिनके पास निर्वाचनों के प्रबंधन और उनके संचालन का ज्ञान और अनुभव हो । 6. खोजबीन समिति--खोजबीन समिति की अध्यक्षता विधि और न्याय मंत्री द्वारा की जाएगी तथा वह भारत सरकार के सचिव की पंक्ति से अन्यून दो अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के रूप में नियुक्ति के लिए, चयन समिति के विचारार्थ पांच व्यक्तियों का एक पैनल तैयार करेगी । 7. चयन समिति--(4) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, राष्ट्रपति द्वारा, निम्नलिखित से मिलकर बनने वाली चयन समिति की सिफारिश पर की जाएगी,-- (क) प्रधानमंत्री - अध्यक्ष ; (ख) लोक सभा में विपक्ष का नेता - सदस्य ; (ग) प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला संघ का एक केबिनेट मंत्री - सदस्य । स्पष्टीकरण--शंकाओं को दूर करने के प्रयोजनों के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जहां लोक सभा में विपक्ष के नेता को उस रूप में मान्यता नहीं दी गई है, वहां लोक सभा में सरकार के विपक्ष में एकल सबसे बड़े दल के नेता को, विपक्ष का नेता समझा जाएगा ।
- (2)मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, चयन समिति में मात्र किसी रिक्ति या उसके गठन में किसी त्रुटि के कारण अविधिमान्य नहीं होगी । 8. चयन समिति की अपनी स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति--(1) चयन समिति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्तों का चयन करने के लिए पारदर्शी रीति में अपनी स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करेगी ।
- (2)चयन समिति, खोजबीन समिति द्वारा पैनल में सम्मिलित किए गए व्यक्तियों से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति पर भी विचार कर सकेगी । 9. पदावधि--(1) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त, अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि के लिए या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करेंगे ।
- (2)मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त, पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे ।
- (3)जहां किसी निर्वाचन आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है, वहां उसकी पदावधि निर्वाचन आयुक्त और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर छह वर्ष से अधिक नहीं होगी । अध्याय 3 मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों का वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें 40. बेतन, आदि--(1) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाएगा : परंतु इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से ठीक पूर्व पदधारण करने वाले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों में उनके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।
- (2)यदि कोई व्यक्ति, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख से ठीक पूर्व, केन्द्रीय सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्ववर्ती सेवा के संबंध में कोई पेंशन (निःशक्तता या क्षति पेंशन से भिन्न) प्राप्त कर रहा था या प्राप्त करने के लिए पात्र होते हुए, उसने ऐसी पेंशन लेने का चयन किया था, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से निम्नलिखित को घटा दिया जाएगा,-- (क) उस पेंशन की रकम ; और (ख) यदि पदग्रहण करने से पूर्व, उसने ऐसी पूर्ववर्ती सेवा के संबंध में उसे देय पेंशन के किसी भाग के बदले में उसका संराशीकृत मूल्य प्राप्त किया था तो पेंशन के उस भाग की रकम ।
- (3)मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त, उसी मंहगाई भत्ते के हकदार होंगे जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अनुजेय हो ।
- (4)मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त, अपनी पदावधि के पूर्ण हो जाने के समय अपने खाते में जमा अर्जित छुट्टी के पचास प्रतिशत के नकदीकरण के हकदार होंगे ।
- (5)जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त, उस रूप में नियुक्ति से पूर्व, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुआ है, वहां वह ऐसी सकल अवधि, जिसके लिए वह उपयोग न की गई अर्जित छुट्टी के नकदीकरण का हकदार होगा, ऐसी सेवा को तत्समय लागू नियमों के अनुसार यथा अनुज्ेय अधिकतम अवधि के अध्यधीन होगी, जिससे वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपनी नियुक्ति से पूर्व संबंध रखता था । 4. पदत्याग और हटाया जाना--(1) मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त, किसी भी समय, राष्ट्रपति को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ।
- (2)मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से, उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं ।
- (3)अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही पद से हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं । 42. छुट्टी-(1) मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त को, उन नियमों के अनुसार छुट्टी मंजूर की जा सकेगी, जो उस सेवा को तत्समय लागू हों, जिससे उसका उसकी नियुक्ति की तारीख से पूर्व संबंध था, और वह धारा 3 में अंतर्विष्ट उपवंधों को विचार में लाए बिना, ऐसी तारीख को अपने नाम जमा छुट्टी को अग्रनीत करने का हकदार होगा ।
- (2)मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त को छुट्टी मंजूर करने या नामंजूर करने और उसे मंजूर की गई छुट्टी को वापस लेने या कम करने की शक्ति, राष्ट्रपति में निहित होगी । 43. पेंशन--(1) जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त सरकार की सेवा में था, वहां वह उस तारीख से सेवानिवृत्त हुआ समझा जाएगा जिसको वह, यथास्थिति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद ग्रहण करता है ।
- (2)मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्त, जो अपनी नियुक्ति के समय उस रूप में भारत सरकार या किसी राज्य सरकार की सेवा में थे, ऐसी नियुक्ति की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर प्रयोग किए जाने वाले अपने विकल्प पर, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपनी नियुक्ति की तारीख से, उस सेवा को लागू, जिससे वे संबंधित थे, नियमों के अधीन अपनी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त करने के हकदार होंगे ।
- (3)उस दशा के सिवाय, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त त्यागपत्र द्वारा पद छोड़ता है, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए यह तभी समझा जाएगा कि उसने अपना पद छोड़ दिया है, यदि-- (क) उसने धारा 9 में विनिर्दिष्ट पदावधि पूरी कर ली है; या (ख) उसने पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है: या (ग) चिकित्सकीय रूप से यह प्रमाणित कर दिया जाता है कि उसका पद छोड़ना उसकी अस्वस्थता के कारण आवश्यक है । 4. साधारण भविष्य निधि में अभिदाय करने का अधिकार--मुख्य निर्वाचन आयुक्त या किसी निर्वाचन आयुक्त के रूप में पद धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, साधारण भविष्य निधि (केन्द्रीय सेवा) नियम, 960 के अधीन साधारण भविष्य निधि में अभिदाय करने का हकदार होगा । 5. सेवा की अन्य शर्तें--इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, राष्ट्रपति, नियमों द्वारा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के यात्रा भत्ता, चिकित्सा सुविधाओं, छुट्टी यात्रा रियायत, प्रवहण सुविधाओं से संबंधित सेवा की शर्तों और उनसे संबंधित सेवा की ऐसी अन्य शर्तों को अवधारित कर सकेगा । 46. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों का संरक्षण--तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त या कोई निर्वाचन आयुक्त है या था, कोई कृत्य, बात या शब्द, जो उसके द्वारा तब कारित किया गया हो, की गई हो या बोला गया हो, जब वह अपने पदीय कर्तव्य या कृत्य का निर्वहन करते हुए कार्य करने के या कार्य करने के लिए तार्तियत होने के दौरान किए गए हों, किन्हीं सिविल या दांडिक कार्यवाहियों को ग्रहण नहीं करेगा या जारी नहीं रखेगा । अध्याय 4. निर्वाचन आयोग के कारबार का संव्यवहार ।7. कारबार का संव्यवहार--निर्वाचन आयोग के कारबार का संव्यवहार, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा । 8. कारबार का निपटाया जाना--(!) निर्वाचन आयोग, अपने कारबार के संव्यवहार की प्रक्रिया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच अपने कारबार के आवंटन को भी सर्वसम्मत विनिश्चय द्वारा, विनियमित कर सकेगा ।
- (2)निर्वाचन आयोग के संपूर्ण कारबार का संव्यवहार, यथासंभव, सर्वसम्मति से किया जाएगा तथा यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुकतों की राय में किसी विषय पर मतभेद है तो ऐसे विषय का विनिश्चय बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा । अध्याय 5 प्रकीर्ण 9. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति--(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के भीतर, ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी ।
- (2)उपधारा (4) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा । 20. रखा जाना--इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और आदेश, उसे बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या आदेश में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएं या तो दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या आदेश नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, ऐसा नियम या आदेश वह ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या निष्प्रभावी हो जाएगा । किंतु आदेश के इस प्रकार उपांतरित या निष्प्रभाव होने से उस नियम या आदेश के अधीन पहले की गई किसी वात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 24. निरसन और व्यावृत्ति-(1) निर्वाचन आयोग (निर्वाचन आयुक्त सेवा शर्त और कारबार का संव्यवहार) अधिनियम, 997 (99] का ) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
- (2)इसके द्वारा निरसित अधिनियम के अधीन की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यित कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
- (3)उपधारा (2) में विशिष्ट विषयों के उल्लेख को ऐसे निरसन के प्रभाव के संबंध में साधारण खंड अधिनियम, 897 (897 का 0) की धारा 6 के साधारण रूप से लागू होने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला या उसे प्रभावित करने वाला नहीं माना जाएगा ।