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Section 8 of The Carriage by Air Act, 1972 in hindi
द्वारा, ऐसे विमानवहन को, जो प्रथम अनुसूची में यथापरिभाषित अन्तरराष्ट्रीय विमानवहन नहीं है और जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रथम अनुसूची के नियम और धारा 3 या धारा 5 या धारा 6 का कोई उपबन्ध लागू कर सकेगी किन्तु ये ऐसे अपवादों, अनुकूलनों और उपान्तरों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए लायू हों गे, जो उस रूप में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
- (2)केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे विमानवहन को, जो द्वितीय अनुसूची में यथापरिभाषित अन्तरराष्ट्रीय विमानवहन है और जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, द्वितीय अनुसूची के नियम तथा धारा 4 या धारा 5 या धारा 6 का कोई उपबन्ध लागू कर सकेगी, किन्तु ये ऐसे अपवादों, अनुकूलनों और उपान्तरों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए लायू होंगे, जो उस रूप में विनिर्दिष्ट किए जाएं । 3[(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तृतीय अनुसूची में अंतर्विष्ट नियमों और धारा 4क या धारा 5 या धारा 6क के किसी उपबंध को, ऐसे विमानवहन को, जो तृतीय अनुसूची में यथापरिभाषित अंतरराष्ट्रीय विमानवहन नहीं है, और जिसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, तथापि, ऐसे अपवादों, अनुकूलनों और उपांतरणों सहित, यदि कोई हों, जो इस प्रकार विनिर्दिष्ट किए जाएं, लागू कर सकेगी ।] “कक. नियम बनाने की शक्ति--(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी । ' 2009 के अधिनियम सं० 28 की धारा 7 द्वारा प्रतिस्थापित । 2 2009 के अधिनियम सं० 28 की धारा 8 द्वारा प्रतिस्थापित । 3 2009 के अधिनियम सं ० 28 की धारा 9 द्वारा प्रतिस्थापित । 4 1206 के अधिनियम सं० 2 की धारा 3 द्वारा अंत:स्थापित ।
- (2)इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना बनाए जाने और जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी । किन्तु नियम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]