Central
Section 20 of The Antiquities and Art Treasures Act, 1972 in hindi
धारा 9 के अधीन अनिवार्यत: अर्जित पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृतियों के लिए प्रतिकर का संदाय
- (1)जहां किसी पुरावशेष अथवा बहुमूल्य कलाकृति का अनिवार्यतः अर्जन धारा 9 के अधीन किया जाता है, वहां प्रतिकर संदत्त किया जाएगा जिसकी रकम इसमें इसके पश्चात् उपवर्णित रीति से और सिद्धान्तों के अनुसार अवधारित की जाएगी, अर्थात् :-- (क) जहां प्रतिकर की रकम करार द्वारा निश्चित की जा सकती है, वहां वह ऐसे करार के अनुसार संदत्त की जाएगी; (ख) जहां ऐसा कोई करार नहीं हो सकता है वहां केन्द्रीय सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को मध्यस्थ नियुक्त करेगी, जो किसी उच्च न्यायलय का न्यायाधीश हो या रहा हो या नियुक्त किए जाने के लिए अर्हित हो; (ग) केन्द्रीय सरकार किसी विशिष्ट मामले में, मध्यस्थ की सहायता करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट कर सकेगी जिसे अनिवार्यत: अर्जित पुरावशेष अथवा बहुमूल्य कलाकृति के स्वरूप का विशेष ज्ञान हो और जहां ऐसा कोई नामनिर्देशन किया जाता है, वहां जिस व्यक्ति को प्रतिकर संदत्त किया जाना है, वह भी उसी प्रयोजन के लिए कोई असेसर नामनिर्दिष्ट कर सकेगा । (घर) मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाहियां प्रारम्भ होने पर, केन्द्रीय सरकार और वह व्यक्ति, जिसे प्रतिकर दिया जाना है, यह कथन करेंगे कि उनकी अपनी-अपनी राय में, प्रतिकर की उचित रकम क्या होगी; (ड) विवाद की सुनवाई करने के पश्चात् मध्यस्थ पंचाट करेगा जिसमें प्रतिकर की ऐसी रकम अवधारित की जाएगी जो उसे न्यायसंगत प्रतीत हो और जिसमें वह व्यक्ति या वे व्यक्ति विनिर्दिष्ट किए जाएंगे जिसको या जिनको ऐसा प्रतिकर संदत्त किया जाएगा और पंचाट करते समय वह हर एक मामले की परिस्थितियों को और उपधारा (2) के उपबन्धों को ध्यान में रखेगा; | (च) जहां इस बारे में कोई विवाद है कि कौन सा व्यक्ति या कौन से व्यक्ति प्रतिकर के हकदार हैं, वहां मध्यस्थ ऐसे विवाद को विनिश्चित करेगा और यदि मध्यस्थ यह पाता है कि एक से अधिक व्यक्ति प्रतिकर के हकदार हैं तो वह प्रतिकर की रकम को ऐसे व्यक्तियों में प्रभाजित करेगा; (छ) माध्यस्थम् अधिनियम, 940 (940 का 0) की कोई भी बात इस धारा के अधीन माध्यस्थम् को लायू न होगी ।
- (2)उपधारा (1) के अधीन प्रतिकर अवधारित करते समय, मध्यस्थ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्--
- (1)वह तारीख या काल जिसका वह पुरावशेष या बहुमूल्य कलाकृति है; (ए) उस पुरावशेष या बहुमूल्य कलाकृति का कला, सौन्दर्य, इतिहास, स्थापत्य, पुरातत्व अथवा मानव शास्त्र सम्बन्धी महत्व;
- (7)पुरावशेष या बहुमूल्य कलाकृति की दुर्लभता; (४) अन्य ऐसी बातें, जो विवाद से संगत हैं ।
- (3)उपधारा (1) के अधीन नियुक्त मध्यस्थ को इस धारा के अधीन माध्यस्थम् कार्यवाही करते समय किसी वाद के विचारण के लिए निम्नलिखित बातों के बारे में सिविल प्रक्रिया संहिता, 908 (908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय की समस्त शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात् :-- (क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसको हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; (ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; (ड) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।